चुनावी हिंसा के बीच पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ मतदान, महिलाओं ने भागीदारी में पुरुषों को पछाड़ा

हिंसा, तनाव और आरोप-प्रत्यारोप के साये में भी पश्चिम बंगाल ने लोकतंत्र के प्रति अपनी गहरी आस्था का परिचय देते हुए मतदान का नया इतिहास रच दिया। भारतीय चुनाव आयोग के अनुसार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर 91.78 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो आज़ादी के बाद अब तक का सर्वाधिक है। इससे पहले 2011 में 84.72 प्रतिशत मतदान का रिकॉर्ड था, जिसे इस बार काफी पीछे छोड़ दिया गया।

पश्चिम बंगाल में महिलाओं की रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी ने चुनाव को बनाया रोमांचक
Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: April 24, 2026 12:07 am

पश्चिम बंगाल में सुबह सात बजे जैसे ही मतदान शुरू हुआ, राज्य के गांवों से लेकर कस्बों और शहरों तक बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें दिखने लगीं। दिन चढ़ने के साथ यह उत्साह और बढ़ता गया और कई इलाकों में शाम तक मतदान केंद्रों के बाहर भीड़ बनी रही।

महिलाओं ने बढ़ाई बढ़त

इस बार की सबसे उल्लेखनीय बात महिलाओं की भागीदारी रही, जिन्होंने पुरुषों से आगे निकलते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी निर्णायक मौजूदगी दर्ज कराई। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पुरुषों का मतदान 90.92 प्रतिशत रहा, जबकि महिलाओं की भागीदारी 92.69 प्रतिशत तक पहुंच गई।

हिंसा ने डाला साया

भारी उत्साह के बीच कई इलाकों में हिंसा और तनाव की घटनाएं भी सामने आईं, जिसने चुनावी माहौल को पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं रहने दिया। मुर्शिदाबाद और बीरभूम जैसे जिलों में सुबह के समय ही झड़पों की खबरें आने लगीं। मुर्शिदाबाद के एक बूथ के बाहर दो पक्षों के समर्थकों के बीच विवाद अचानक हिंसक हो गया और देसी बम फेंके जाने से अफरातफरी मच गई। मौके पर तैनात केंद्रीय बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया गया।

संवेदनशील इलाकों में तनाव

बीरभूम में कुछ स्थानों पर कथित प्रॉक्सी वोटिंग और मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगे, जिस पर चुनाव आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी। उत्तर 24 परगना और कुछ अन्य क्षेत्रों से भी पथराव और डराने-धमकाने की शिकायतें मिलीं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता अपने घरों से निकलकर मतदान केंद्रों तक पहुंचे।

डर के बीच भी उत्साह

कई जगहों पर महिलाओं और बुजुर्गों की लंबी कतारें यह संकेत दे रही थीं कि भय का माहौल पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सका। एक बुजुर्ग महिला मतदाता ने कहा कि डर जरूर था, लेकिन वोट देना उससे ज्यादा जरूरी है। पहली बार मतदान करने पहुंचे युवाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला।

कड़ी सुरक्षा और निगरानी

चुनाव आयोग ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। 44 हजार से अधिक मतदान केंद्रों पर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस की तैनाती की गई थी और पूरे मतदान की 100 प्रतिशत लाइव वेबकास्टिंग कराई गई। करीब 2.21 लाख मतदान कर्मियों ने इस विशाल प्रक्रिया को संचालित किया, जबकि 1478 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई।

सियासी घमासान तेज

मतदान के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। विपक्षी दलों ने सत्ताधारी दल पर हिंसा और धांधली के आरोप लगाए, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने इन्हें खारिज करते हुए शांतिपूर्ण मतदान का दावा किया। दरअसल, यह चुनाव राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है, जिसने इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है।

क्या कहते हैं संकेत

रिकॉर्ड स्तर पर हुआ यह मतदान संकेत देता है कि मुकाबला बेहद कड़ा है और मतदाता किसी भी तरह का स्पष्ट संदेश देने के मूड में हैं। खासकर महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी ने इस चुनाव को और अधिक निर्णायक बना दिया है। अब सबकी नजर अगले चरणों पर टिक गई है, क्योंकि पहले चरण का यह उत्साह और रुझान ही अंततः सत्ता की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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