85 पदक से बड़ी कहानी: एशियन गेम्स में बदली भारतीय खेलों की तस्वीर; महिला शक्ति से हॉकी के ओलंपिक टिकट तक

एशियन गेम्स 2026 में भारत का अभियान सिर्फ 85 पदकों और चौथे स्थान की कहानी नहीं है। आखिरी दो दिनों में आए स्वर्ण पदकों ने पदक तालिका जरूर बदल दी, लेकिन इस बार भारत की कहानी का बड़ा पहलू यह है कि कई ऐसे खेलों और खिलाड़ियों ने इतिहास रचा, जिनसे भारतीय खेलों की तस्वीर आने वाले वर्षों में बदल सकती है। भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य समेत कुल 85 पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। सबसे बड़ा संकेत महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन से मिला। भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल के इंतजार के बाद एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीता। 1982 के बाद पहली बार भारत की महिला हॉकी टीम एशियाई चैंपियन बनी।

एशियाड 2026 में भारत ने अपने चिरप्रतिद्वंदी पाकिस्तान के 19 रनो से हकार कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: October 3, 2026 11:21 pm

इसके बाद कुमकुम मोहोड ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी में भारत के लिए नया इतिहास बनाया। वह इस स्पर्धा में एशियन गेम्स स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। प्रणवी उर्स ने महिला व्यक्तिगत गोल्फ में भारत को पहला एशियन गेम्स स्वर्ण दिलाया।
यानी भारत के अंतिम दौर के स्वर्ण केवल संख्या बढ़ाने वाले पदक नहीं थे। इनमें ऐसे परिणाम भी शामिल रहे जिन्होंने अलग-अलग खेलों में नए रिकॉर्ड बनाए।

हॉकी ने दिया दोहरा संदेश

पुरुष हॉकी टीम ने भी मलेशिया को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक बरकरार रखा। इस जीत के साथ भारत को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन भी मिला। खास बात यह रही कि पहली बार भारत की पुरुष और महिला—दोनों हॉकी टीमें एक ही एशियन गेम्स में चैंपियन बनीं। पुरुष हॉकी का स्वर्ण भारत के पदकों की संख्या को 21 तक ले गया और इसी के साथ भारत उज्बेकिस्तान को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंच गया। दोनों देशों के खाते में 21-21 स्वर्ण रहे, लेकिन भारत के 27 रजत पदक, उज्बेकिस्तान के 25 रजत से ज्यादा थे।

क्रिकेट में पाकिस्तान पर जीत और हॉकी में मलेशिया पर

अंतिम दौर में क्रिकेट और हॉकी ने भी भारत को दो बड़े टीम गोल्ड दिए। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराकर अपना एशियन गेम्स खिताब बरकरार रखा। इसके बाद पुरुष हॉकी टीम ने मलेशिया को 5-1 से हराया। इस तरह अंतिम चरण में भारत के प्रदर्शन में एक दिलचस्प विविधता दिखाई दी—क्रिकेट और हॉकी जैसे टीम खेलों के साथ कुश्ती, तीरंदाजी और गोल्फ के व्यक्तिगत मुकाबलों से भी स्वर्ण आए।

आखिरी दो दिन में बदली पदक तालिका

भारत के अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू उसकी देर से आई स्वर्णिम तेजी रही। गुरुवार तक भारत के खाते में केवल 10 स्वर्ण थे और वह पदक तालिका में शीर्ष 10 से बाहर था। अंतिम दो दिनों में भारत ने 11 और स्वर्ण अपने नाम किए और कुल संख्या 21 तक पहुंचा दी।
यही तेजी भारत को चौथे स्थान तक ले गई। हालांकि कुल पदकों की संख्या के मामले में यह 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स के 106 पदकों से कम है, लेकिन 2026 में जीते 21 स्वर्ण भारत का किसी एक एशियन गेम्स में दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण आंकड़ा है। चौथा स्थान भी 2023 के प्रदर्शन के बराबर है।

85 पदकों से आगे की कहानी

इसलिए एशियन गेम्स 2026 से भारत की तस्वीर को केवल “85 पदक और चौथा स्थान” कहकर समेटना अधूरा होगा। महिला हॉकी का 44 साल बाद स्वर्ण, महिला तीरंदाजी और गोल्फ में ऐतिहासिक व्यक्तिगत स्वर्ण, क्रिकेट और हॉकी में टीम गोल्ड तथा हॉकी से ओलंपिक क्वालिफिकेशन—ये उपलब्धियां भारत के इस अभियान को अलग-अलग खेलों में नए अध्याय खुलने की कहानी भी बनाती हैं।

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