प्रेरणादायक उपन्यासकार हैं ओम् प्रकाश पाण्डेय : सुरेंद्र पाल सिंह

लेखक डा ओम् प्रकाश पाण्डेय एक कुशल और प्रेरणादायक उपन्यासकार हैं। इनका लोकार्पित उपन्यास 'आत्म-हत्या के पहले' अपनी सशक्त शैली, कथा-वस्तु और मार्मिक संवादों के कारण पाठक समुदाय के हृदय तक पहुँचेंगे। ऐसा विश्वास किया जाना चाहिए।

Written By : डेस्क | Updated on: September 7, 2025 10:07 pm

यह बात, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, दशरूपक फिल्म्स, पटना के तत्वावधान में, आयोजित समारोह में, वरिष्ठ उपन्यासकार डा ओम् प्रकाश पाण्डेय के उपन्यास  ‘आत्म-हत्या के पहले’ का लोकार्पण करते हुए, अत्यंत लोकप्रिय धारावाहिक ‘महाभारत’ में द्रोणाचार्य की भूमिका के लिए सुप्रसिद्ध अभिनेता सुरेंद्र पाल सिंह ने कही। श्री पाल ने कहा कि बिहार में बहुत बदलाव आया है। पहली बार 1980 में एक भोजपुरी फ़िल्म ‘गंगा की बेटी’ की शूटिंग के सिलसिले में पटना आया था। तब का बिहार कुछ और था। अब कुछ और दिख रहा है। 38 साल की अपनी अभिनय-यात्रा में मैंने 100 से अधिक फ़िल्मों और विविध धारावाहिकों के दस हज़ार से अधिक एपिसोड में अभिनय किया है। अनेक ऐतिहासिक पात्रों को जिया, जिनमे दक्ष प्रजापति से लेकर ऋषि वशिष्ठ तक और परशुराम से लेकर चंद्रगुप्त मौर्य तक की भूमिकाएँ की।

श्री पाल ने महाभारत के अनेक संवाद भी सुनाए तथा इन पंक्तियों से नसीहत दी कि “ये ज़िंदगी एक खूबसूरत जंग है इसे जारी रखिए।” श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

  ‘अभिनय शिरोमणि’ उपाधि से अलंकृत किए गए अभिनेता सुरेंद्र पाल सिंह

साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने श्री पाल को साहित्य सम्मेलन की विशिष्ट उपाधि ‘अभिनय शिरोमणि’ से अलंकृत किया। अपने संबोधन में डा सुलभ ने कहा कि लोकार्पित पुस्तक के लेखक डा ओम् प्रकाश पाण्डेय किशोर वय से गम्भीर लेखन करते रहे हैं। लिखने के पूर्व विषय और कथा-वस्तु पर बहुत गम्भीर चिंतन करते हैं। शब्द-संयोजन, विम्ब, प्रतीक और शैली के प्रति भी बहुत सतर्क रहने वाले लेखक डा पाण्डेय की यह पुस्तक युवाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों, उनके द्वंद्व, प्रेम में विछोह की मार्मिक अभिव्यक्ति करती है।

समारोह के मुख्य-अतिथि और पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, डा मधु वर्मा, दशरूपक फ़िल्मस की निदेशक और लेखक की पत्नी ललिता पाण्डेय तथा डा रत्नेश्वर सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन में वरिष्ठ कवि प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, प्रो समरेंद्र नारायण आर्य, डा पुष्पा जमुआर, कवयित्री अनीता प्रसाद, चाँदनी समर, शुभचंद्र सिन्हा, कुमार अनुपम, डा शमा नासनीन नाजां, कमल किशोर वर्मा, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, संजय लाल चौधरी, इन्दु भूषण सिन्हा,अश्विनी कविराज ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं पर गहरा प्रभाव डाला। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

इसके पूर्व हिन्दी पखवारा के अंतर्गत साम्मेलन सभागार में ‘काव्य-कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें सुप्रसिद्ध छंदकार रामरक्षा मिश्र ‘विमल’, आचार्य विजय गुंजन और सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने काव्य-कर्म की विविध विधाओं में सोदाहरण चर्चा की तथा छंद-विधान में प्रशिक्षण प्रदान किया। सोमवार को कवयित्री-सम्मेलन आयोजित है।

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