पहली उड़ान के साथ ही जेवर एयरपोर्ट औपचारिक रूप से यात्रियों के लिए खुल गया। इंडिगो की उड़ान लखनऊ से जेवर पहुंची और फिर किसानों को लेकर राजधानी रवाना हुई। यह केवल एक विमान की उड़ान नहीं थी, बल्कि उस सपने की उड़ान थी जिसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों, श्रमिकों और स्थानीय लोगों ने वर्षों पहले साकार होते देखने की कल्पना की थी।
इस अवसर को विशेष बनाने के लिए जेवर क्षेत्र के विधायक धीरेंद्र सिंह की पहल पर उन किसानों को पहली उड़ान का यात्री बनाया गया, जिन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन एयरपोर्ट परियोजना के लिए उपलब्ध कराई थी। जिन खेतों में कभी फसलें लहलहाती थीं, आज वहीं अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा खड़ा है और उन्हीं किसानों ने उसके पहले यात्रियों के रूप में आसमान की यात्रा की। यह दृश्य विकास और भागीदारी के दुर्लभ संगम के रूप में देखा गया।
लखनऊ पहुंचने पर किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और एयरपोर्ट परियोजना को साकार करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने भी किसानों के योगदान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी। किसानों के लिए यह केवल हवाई यात्रा नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में आए परिवर्तन को प्रत्यक्ष रूप से महसूस करने का अवसर था।
करीब 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली मानी जा रही है। जेवर एयरपोर्ट के संचालन से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र, आगरा, मथुरा और आसपास के जिलों को वैश्विक संपर्क मिलेगा। उद्योग, पर्यटन, निर्यात, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। साथ ही दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी।
जेवर एयरपोर्ट की शुरुआत ने यह संदेश भी दिया है कि बड़ी विकास परियोजनाएं केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की भागीदारी और विश्वास से सफल होती हैं। पहली उड़ान में किसानों की मौजूदगी ने इस उपलब्धि को एक मानवीय और भावनात्मक आयाम दिया। खेतों से लेकर हवाई सफर तक की यह यात्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदलते स्वरूप और नए भारत की विकास गाथा का प्रतीक बन गई है।
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