पठनीय है नंदकिशोर नंदन का काव्य संग्रह “हरसिंगार हैं खिले”

हिंदी में प्राध्यापक कवियों की वेक लंबी परंपरा रही है. ध्यातव्य है कि काव्य शास्त्र का अध्ययन अध्यापन और विवेचन करते करते बहुत से प्राध्यापक स्वयं भी काव्य रचना की ओर उन्मुख हो जाते हैं. रोचक है ये प्राध्यापक कवि यदि काव्य शास्त्र के सिद्धांतों और सीमा रेखाओं का  अनायास अतिक्रमण भी कर जाते हैं तो यह कविता की सुंदरता और सौष्ठव के लिए होता है. हालांकि बहुत से विद्वान प्राध्यापकों की नीरस,उबाऊ ,पांडित्यपूर्ण तुकबंदियां आपने पढ़ी होंगी जिनमें तत्सम और तद्भव शब्दों का शायद प्रवेश कराकर सपाट कविता परोसी जाती है. बी आर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के यशस्वी प्राध्यापक डॉ. नंदकिशोर नंदन एक गंभीर शोधकर्ता, खोजी पत्रकार, कहानीकार , समाजवादी चिंतक और जनसाधारण को समझने वाले सरल कवि रहे हैं.

Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: July 30, 2026 12:43 am

इन्होंने विशिष्ट हिंदी कवि गोपाल सिंह नेपाली पर बहुत महत्वपूर्ण किताब लिखी है. नंदन जी का नेपाली जी से लंबे समय तक निकट संपर्क रहा था. इस सब के इतर नंदन जी एक बहुत कोमल भावना के गंभीर कवि भी हैं . कविता संग्रह ” हरसिंगार हैं खिले” इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है.

148पृष्ठ के इस कविता संग्रह के प्रारंभ में नंदन जी इसे “रमा”को समर्पित करते है. हिंदी के बहुत से लेखक और कवि कह गए हैं कि युवावस्था में तो लोग प्रेम करते है. अच्छी प्रेम कविताएं तो एक खास अवस्था होने के बाद ही लिखी जाती है. संग्रह में कुल 100 छोटी छोटी कविताएं हैं जिनमें 150ग़ज़ल भी शामिल हैं. इन सारी कविताओं में प्रेम भाव के अलग अलग रूप हैं .

प्रेम की आम धारणा और अभिव्यक्ति से अलग ये प्रेम भाव इस रूप में व्यक्त किए गए हैं जहाँ उम्र और शरीर गौण हो जाता है. भले है यह उस निराकार से प्रेम पर आश्रित न हो पर इशारा तो उधर है. कवि अपनी कविताओं में स्थापित करते हैं कि “प्रेम ” ही सभी जीवों का और मनुष्य का भी स्थायी भाव है बाकी सारे भाव बहुत अस्थायी और क्षणिक हैं. संग्रह के कुछ कविताओं के शीर्षक देखिए : आखिरी प्रेम पत्र, मेरीवाली भी सुंदर है, प्यार तुम्हारा यौवन वाला, कब जीवन से प्यार करेंगे, मैं छाया बनकर चलता था, जिन आंखों में बटम बसती हो, जिसके मन में प्रेम, प्रेम किया तो तड़पा इत्यादि. देखिए कविता’ ऐसा भी क्या प्रेम ‘ की कुछ पंक्तियां: “ऐसा भी क्या प्रेम तुम्हारा/मैं ही तुम्हें पुकारूं,/ सदा उलीचूं अपना अंतर/अपना सब कुछ वारूं . ” कविताएं सतही तौर पर एक अर्थ एक है और गूढ़ अर्थ अलग हैं. संग्रह संग्रहणीय और पठनीय है.

संग्रह: हरसिंगार हैं खिले, कवि: नंदकिशोर नंदन, प्रकाशक : शब्दलोक, नई दिल्ली, पृष्ठ: 148. मूल्य: रु.175.

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)

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