साहित्य, संस्कृति एवं कला के संवर्धन के लिए आईजीएनसीए और लेखक गांव के बीच एमओयू

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) एवं लेखक गांव, देहरादून के बीच साहित्य, संस्कृति एवं कला के क्षेत्र में सहयोग और संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। आईजीएनसीए की ओर से सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी तथा लेखक गांव की ओर से निदेशक श्रीमती विदुषी निशंक ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। आईजीएनसीए के डीन (प्रशासन) और कला निधि प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेश चंद्र गौड़ भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम आईजीएनसीए के उमंग सम्मेलन कक्ष में संपन्न हुआ।

एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद डॉ. सच्चिदानंद जोशी-विदुषी निशंक साथ में डॉ. रमेश चंद्र गौड़
Written By : डेस्क | Updated on: June 17, 2026 10:26 pm

इस अवसर पर दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की और भविष्य में संयुक्त संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, सांस्कृतिक आयोजनों और शोधपरक गतिविधियों के संचालन की संभावनाओं पर चर्चा की। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, लेखक गांव के साथ मिलकर आईजीएनसीए वहां क्या कर सकता है, यह प्रश्न हमारे सामने था।

हमारा सम्बंध सीधे-सीधे लेखकों से नहीं है। हम कुछ कार्यक्रम करते हैं, जिसमें लेखकों को आमंत्रित करते हैं, पर वैसे सीधे-सीधे हमारा सम्बंध लेखकों से नहीं होता। खासकर, जो समकालीन साहित्यकार, लेखक हैं, उनसे तो बिल्कुल ही नहीं हो पाता। एक-आध कार्यक्रम अगर होते हैं, क्योंकि हम अलग तरह के प्रकल्पों पर काम करते हैं, जो भारतीय संस्कृति की स्थायी निधि, स्थायी कोष, स्थायी संदर्भ की बात करते हैं। तो हम क्या लेखक गांव के साथ कर सकते हैं? तो, हमें यह समझ में आया कि ऐसी बहुत सारी चीजें हैं, जहां हमें ऐसे विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ती है, जो एक साथ बैठकर एक नैसर्गिक एवं निष्पक्ष वातावरण में मंथन करें।

अगर आप यहां बैठकर मंथन करते हैं, तो थोड़ी देर बाद आपके अंदर यह बात हावी होने लगती है कि हम कला केंद्र में बैठे हैं। यह आपके अवचेतन में आ जाता है, तो आपके अंदर जो एक निष्पक्ष विचार प्रक्रिया होनी चाहिए, वह शायद कई बार नहीं होती। इसलिए हमको लगा कि अगर हम एक ऐसी जगह जाएंगे, जहां हमारे विद्वान शांत एवं निष्पक्ष वातावरण में बैठकर मंथन कर सकें, ऐसी जगह हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा, दूसरा एक विचार यह आया कि हम लोग बहुत सारे युवा पेशेवरों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम करते हैं, चाहे फिर वह कंजर्वेशन हो, रिसर्च मेथोडोलॉजी हो, कल्चरल इंफॉर्मेटिक्स हो, क्रिटिकल एडिशन तैयार करना हो। तो ऐसे में वर्कशॉप के लिए भी अगर हम कोई ऐसी आवासीय जगह ढूंढ़े, जहां पर प्रतिभागी अपनी पढ़ाई की अवधि के बाद भी आपस में बातचीत करके उसको आगे बढ़ा सकें, ऐसा वातावरण भी आपको लेखक गांव में मिलता है। यह रचनात्मकता के लिए उर्वर भूमि तैयार करने वाला एक स्थान है, पवित्र स्थान है। इसकी ऊर्जा और प्रेरणा से लोगों की रचनात्मकता मुखरित हो सकती है।

विदुषी निशंक ने लेखक गांव के बारे में बताते हुए कहा कि लेखक गांव की यात्रा इस प्रश्न से शुरू हुई थी कि लेखक के बारे में कोई सोचेगा क्या? क्या कोई ऐसा स्थान होगा, जहां साहित्य केवल लिखा नहीं जाएगा, बल्कि जिया भी जाएगा? जहां प्रकृति, संस्कृति, संवेदना, संवाद और सृजन एक साथ उपस्थित होंगे? जहां हिमालय केवल दृश्य नहीं, बल्कि दृष्टि बनेगा।

इसी विचार से, हिमालय और मां गंगा के आशीर्वाद के साथ तथा डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक जी की अविराम साधना और दूरदृष्टि ने लेखक गांव की परिकल्पना को यथार्थ के धरातल पर उतारा है। यह इस देश का पहला लेखक गांव है, जो हिमालय की वादियों में बसा है। लेखक गांव केवल लेखकों के लिए सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत केंद्र है। यह साझेदारी दोनों संस्थानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आईजीएनसीए के सानिध्य में यह हमारे लिए बहुत बड़ा अवसर है। यह दो संस्थानों का मिलन नहीं है, बल्कि दो विचारों का मिलन है।

प्रो. रमेश चंद्र गौड़ ने कहा, जब हम किसी भी संस्था के साथ एमओयू साइन करते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह होता है कि दोनों संस्थाएं मिलकर भारतीय साहित्य और संस्कृति को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं। लेखक गांव के साथ यह समझौता ज्ञापन कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अनूठी पहल है। भारत में ऐसी जगहों के उदाहरण आपको बहुत कम देखने को मिलेंगे, जहां जाकर आप रुक सकते हैं, अपनी किताब लिख सकते हैं, अपनी रिसर्च कर सकते हैं।

समझौता ज्ञापन कार्यक्रम में आईजीएनसीए के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, लेखक गांव के प्रतिनिधियों, डॉ. बेचैन कंडियाल, अलका सिन्हा, सर्वेश उनियाल सहित साहित्य, संस्कृति एवं कला जगत से जुड़े अनेक विद्वान, लेखक, कलाकार, शोधार्थी तथा अतिथि उपस्थित रहे। दोनों संस्थानों के बीच यह समझौता ज्ञापन दो सांस्कृतिक धाराओं का एक मिलन है। निश्चित रूप से यह समझौता ज्ञापन भारतीय सभ्यता, संस्कृति और कला के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

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