इस जंग का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ने की आशंका है। हमले का शिकार हुए जहाज पर सवार 11 भारतीय क्रू सदस्यों में से 10 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय नाविक अब भी लापता है। विदेश मंत्रालय ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए खोज एवं बचाव अभियान जारी रहने की जानकारी दी है।
ईरान ने घोषणा की है कि हॉरमुज़ जलडमरूमध्य अगली सूचना तक बंद रहेगा और केवल उसकी अनुमति से ही जहाजों की आवाजाही होगी। इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के मिसाइल ठिकानों, ड्रोन अड्डों, नौसैनिक प्रतिष्ठानों तथा कमांड एवं संचार नेटवर्क पर व्यापक हवाई हमले किए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
जवाबी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी पीछे हटने के संकेत नहीं दिए। ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले कई देशों की ओर दागा गया, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का दायरा और फैलने की आशंका गहरा गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉरमुज़ जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहा तो यह केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट बन जाएगा।
भारत के लिए यह संकट इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश अपने कच्चे तेल के बड़े हिस्से के आयात के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर है और हजारों भारतीय नागरिक तथा नाविक इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। हॉरमुज़ मार्ग में किसी भी प्रकार का लंबा व्यवधान भारत के तेल आयात, माल ढुलाई लागत और घरेलू ईंधन कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। इसी कारण नई दिल्ली ने सभी पक्षों से संयम बरतने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
कूटनीतिक स्तर पर ओमान, कतर और अन्य देशों के प्रयास फिलहाल युद्ध की रफ्तार रोकने में सफल नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जहाजों पर हमले जारी रहे तो सैन्य कार्रवाई और तेज होगी, जबकि ईरान ने भी पीछे हटने के बजाय “प्रतिरोध जारी रखने” का संदेश दिया है। ऐसे में पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध भड़क सकता है।
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