भाजपा की नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आठ राष्ट्रीय महामंत्री और 16 राष्ट्रीय मंत्री हैं। इसके अलावा कोषाध्यक्ष, सह-कोषाध्यक्ष, संगठन से जुड़े पदाधिकारी, विभिन्न मोर्चों के अध्यक्ष तथा मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं। पार्टी ने महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व दिया है।
वसुंधरा राजे और राम माधव की वापसी
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। लंबे समय से राजस्थान की राजनीति में सक्रिय राजे को राष्ट्रीय संगठन में फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना खासा अहम माना जा रहा है।
इसी तरह राम माधव की भी केंद्रीय संगठन में वापसी हुई है। वह पहले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं और जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।
भाजपा ने राष्ट्रीय महामंत्रियों की टीम में भी बड़ा बदलाव किया है। विनोद तावड़े और सुनील बंसल को बरकरार रखा गया है, जबकि स्मृति ईरानी, बिप्लब कुमार देब, संजय भाटिया, सतीश पूनिया, हरीश द्विवेदी और गजेंद्र पटेल को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।
स्मृति ईरानी की संगठन में जोरदार वापसी
2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद राष्ट्रीय राजनीति में स्मृति ईरानी की सक्रिय भूमिका अपेक्षाकृत सीमित थी। अब उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर भाजपा ने उन्हें फिर केंद्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।
ईरानी को उत्तर प्रदेश से जुड़े संगठनात्मक काम में भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे भाजपा की यूपी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेठी से राहुल गांधी को हराने और उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी पहचान को देखते हुए पार्टी के भीतर उनकी चुनावी उपयोगिता को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
उत्तर प्रदेश को खास महत्व
नबीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश के आठ नेताओं को जगह मिली है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर, राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी, राष्ट्रीय मंत्री डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष अमरपाल मौर्य और अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष कुंवर बासित अली यूपी से हैं।
प्रो. तारिक मंसूर, जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हैं, को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों नियुक्तियों को उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामाजिक और राजनीतिक विस्तार की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। व्यापक वर्गीकरण में भाजपा की नई टीम में छह अल्पसंख्यक समुदायों से आने वाले नेताओं को प्रतिनिधित्व मिलने की बात सामने आई है।
बिहार से तीन नेताओं को जगह
नितिन नबीन के गृह राज्य बिहार से तीन नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिली है। सिद्धार्थ शंभु को राष्ट्रीय मंत्री, ऋतुराज सिन्हा को प्रकोष्ठ संकुल सह-संयोजक और शिवेश कुमार राम को एससी मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया है।
नबीन स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और इसलिए बिहार के तीन नेताओं की यह संख्या उनके पद को शामिल किए बिना है।
अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के
भाजपा की नई टीम में डिजिटल संगठन में भी बड़ा बदलाव किया गया है। लंबे समय से पार्टी के आईटी सेल की कमान संभाल रहे अमित मालवीय को इस जिम्मेदारी से हटाया गया है। उनकी जगह दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है।
पार्टी ने सोशल मीडिया तंत्र में सह-संयोजकों की नियुक्ति भी की है। इसके साथ ही मीडिया विभाग में अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाए रखते हुए प्रदीप भंडारी, सिद्धार्थ यादव और आशीष उषा अग्रवाल को मीडिया से जुड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं। युवा मोर्चे की कमान अब वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी को दी गई है। उन्होंने तेजस्वी सूर्या की जगह ली है।
पीयूष गोयल को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। राजस्थान के राजेश मंगल को सह-कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
नई टीम में संगठन के पुराने और नए चेहरों का मिश्रण दिखाई देता है। बीएल संतोष राष्ट्रीय महामंत्री संगठन के पद पर बने हुए हैं। उनके साथ शिवप्रकाश और सौदान सिंह को सह-महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी दी गई है।
दिल्ली, यूपी और मध्य प्रदेश का दबदबा
राज्यवार देखें तो नई राष्ट्रीय टीम में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का खासा प्रतिनिधित्व है। इसके बाद राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से कई नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिली है।
दिल्ली से बीएल संतोष, सुनील बंसल, संदीप पाठक समेत कई पदाधिकारी हैं। मध्य प्रदेश से लाल सिंह आर्य, गजेंद्र पटेल, कविता पाटीदार समेत छह नेताओं को जिम्मेदारी मिली है। राजस्थान से वसुंधरा राजे, सतीश पूनिया और अन्य नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
51 नए चेहरे, चुनावी तैयारी का संकेत
नई टीम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि 65 में 51 चेहरे नए हैं। केवल 14 पुराने पदाधिकारियों को बरकरार रखा गया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की संख्या बढ़ाकर 13 और राष्ट्रीय महामंत्रियों की संख्या आठ की गई है। राष्ट्रीय मंत्रियों की संख्या भी बढ़ाई गई है।
भाजपा का यह संगठनात्मक पुनर्गठन ऐसे समय हुआ है जब अगले वर्ष कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी का दौर भी शुरू हो चुका है। ऐसे में नई टीम में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े चुनावी राज्य को मिला महत्व, स्मृति ईरानी की वापसी, वसुंधरा राजे और राम माधव को केंद्रीय संगठन में जगह तथा डिजिटल और युवा मोर्चे में बदलाव को पार्टी की आगामी राजनीतिक रणनीति के महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर नितिन नवीन की पहली बड़ी संगठनात्मक टीम में अनुभव और नए चेहरों का संतुलन बनाने के साथ चुनावी राज्यों, सामाजिक प्रतिनिधित्व और डिजिटल संगठन पर विशेष जोर दिखाई देता है। 65 सदस्यीय टीम में 51 नए चेहरे शामिल होना इस बात का संकेत है कि भाजपा ने राष्ट्रीय संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव का फैसला किया है।
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