जांच एजेंसी के अनुसार सत्येंद्र जैन का मामला दिल्ली जल बोर्ड के 10 STP के विस्तार और उन्नयन से जुड़े टेंडरों में कथित अनियमितताओं और आपराधिक साजिश का है। आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को इस तरह तैयार किया गया कि एक खास कंपनी को फायदा मिल सके। जांच में करीब 1.52 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय लेन-देन का भी पता चलने का दावा किया गया है।
जैन और उदित प्रकाश राय के अलावा पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव तथा निजी क्षेत्र से जुड़े नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा को गिरफ्तार किया गया है। मामले में जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद होगी।
जैन की दूसरी बार गिरफ्तारी
सत्येंद्र जैन इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग के एक अलग मामले में करीब 18 महीने जेल में रह चुके हैं। अक्टूबर 2024 में उन्हें जमानत मिली थी। इस बार उनकी गिरफ्तारी दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर मामले में ACB ने की है। जैन के खिलाफ दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े मामलों में पहले भी जांच हो चुकी है। इसी STP प्रकरण से जुड़े एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी कार्रवाई कर चुका है।
पंजाब की जिम्मेदारी के बीच गिरफ्तारी
जैन को हाल में पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए AAP का सह-प्रभारी बनाया गया है। ऐसे समय उनकी गिरफ्तारी से पार्टी के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ गई है। AAP ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जैन की गिरफ्तारी को भाजपा के इशारे पर की गई कार्रवाई बताते हुए कहा कि मामला अंततः झूठा साबित होगा। पार्टी का तर्क है कि संबंधित टेंडर 2022 में जारी हुआ था और जैन उसी साल मई में गिरफ्तार हो चुके थे।
दूसरी ओर, जांच एजेंसी का कहना है कि कार्रवाई टेंडर प्रक्रिया में सामने आई कथित अनियमितताओं और वित्तीय लेन-देन के आधार पर की गई है। पंजाब चुनाव से पहले हुई गिरफ्तारी ने AAP के लिए भ्रष्टाचार के पुराने आरोपों को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
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