नेपाल में तबाही का पैमाना लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को नेपाली अधिकारियों के अनुसार देश में मृतकों की संख्या 781 पहुंच गई, जबकि 2,502 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 592 विदेशी नागरिक शामिल हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है। इस तरह नेपाल और तिब्बत को मिलाकर इस आपदा में 797 लोगों की मौत और 3,048 लोगों के लापता होने की पुष्टि हो चुकी है लेकिन भारतीयों को राहत भरी खबर मिली है।
विदेशी नागरिकों की संख्या भी इस त्रासदी के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को दिखाती है। नेपाल में लापता 592 विदेशी नागरिकों के अलावा तिब्बत में लापता 546 लोगों में 261 विदेशी हैं। यानी दोनों तरफ मिलाकर कम से कम 853 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं। इनमें भारत सहित कई देशों के नागरिक शामिल हैं। तिब्बत में लापता विदेशी नागरिकों में 49 भारतीय, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक भी शामिल हैं।
भारत ने बढ़ाया रेस्क्यू ऑपरेशन
भारतीय नागरिकों की तलाश के साथ भारत ने नेपाल के राहत अभियान में अपनी भूमिका और बढ़ा दी है। नेपाल में फंसे लोगों को निकालने के अलावा भारत से राहत सामग्री और विशेषज्ञ सहायता भेजी जा रही है। हादसे में कई लोग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। नेपाल के नौ हाइड्रोपावर प्रोजेक्टों से जुड़े 537 कर्मचारी अब भी लापता बताए गए हैं।
सबसे बड़ी चुनौती त्रिशूली हाइड्रोपावर कॉम्प्लेक्स में फंसे लोगों को निकालना है। बचाव दल ने सुरंग तक हवा पहुंचाने के लिए पाइप डालने में सफलता हासिल की है और अब मलबा हटाकर अंदर पहुंचने की कोशिश की जा रही है। खराब मौसम, दुर्गम पहाड़ी इलाकों और मलबे के कारण अभियान बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।
भारत में भी पहुंची तबाही की लहर
इस आपदा का असर नेपाल की सीमा से बाहर भारत तक पहुंच चुका है। नेपाल से बहकर आने वाली नदियों में कुछ शव भारत के इलाकों तक पहुंच गए हैं। भारतीय अधिकारियों ने कम से कम सात शव बरामद किए हैं, जिनके नेपाल की बाढ़ के पीड़ित होने की आशंका है। इन शवों को नेपाल के आधिकारिक मृतक आंकड़े में अभी शामिल नहीं किया गया है।
इस बीच नेपाल में एक बार फिर ताजा बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रभावित इलाकों में चेतावनी जारी की गई है। चीन की ओर से ऊपर की तरफ पानी का बहाव बढ़ने की सूचना मिलने के बाद नेपाल के अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है।
इसलिए पांचवें दिन भी राहत और बचाव अभियान खत्म होने की स्थिति में नहीं है। 149 भारतीयों का सुरक्षित निकलना बड़ी राहत है, लेकिन 275 भारतीयों का अब भी लापता होना भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। वहीं 3,048 लोगों का अब भी पता नहीं चलना बताता है कि हिमालयी क्षेत्र में आई यह आपदा अपने पीछे कितनी बड़ी मानवीय त्रासदी छोड़ गई है।
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