नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल में अब तक 669 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। तिब्बत में सात लोगों की मौत के साथ इस आपदा में मृतकों की कुल संख्या 676 हो गई है। करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। 3,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
झील का पानी घटा, तत्काल खतरा कम
सबसे बड़ी राहत चीन-नेपाल सीमा के पास बनी उस झील को लेकर है, जिसके अचानक फटने की आशंका से दूसरी बड़ी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। Reuters के मुताबिक गुरुवार से शनिवार के बीच झील का क्षेत्रफल करीब 21 हजार वर्ग मीटर घटकर 99 हजार वर्ग मीटर रह गया है। कुछ हिस्सों में झील की तलहटी भी दिखाई देने लगी है। इससे नीचे के इलाकों में अचानक भारी मात्रा में पानी आने की आशंका कम हुई है।
हालांकि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ग्लेशियर के पास एक दूसरी और बड़ी झील का भी पता चला है। उसकी गहराई अभी स्पष्ट नहीं है। चीनी अधिकारी ड्रोन और रडार से लगातार निगरानी कर रहे हैं और संभावित भूस्खलन जैसी दूसरी आपदाओं को लेकर भी सतर्क हैं।
करीब 3 हजार लोग अब भी लापता
बाढ़ के तेज बहाव में घरों, पुलों, सड़कों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं का बड़ा हिस्सा बह गया। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत और बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
AP के मुताबिक करीब 3,000 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें विदेशी पर्यटक और नेपाल में विभिन्न परियोजनाओं में काम करने वाले विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। एक अन्य खबर के मुताबिक त्रिशूली नदी के किनारे हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले करीब 900 कर्मचारी लापता हैं, जिनमें 63 भारतीय भी शामिल हैं।
287 भारतीयों का अब तक सुराग नहीं
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता नेपाल में लापता भारतीय नागरिकों को लेकर है। विदेश मंत्रालय के ताजा अपडेट के मुताबिक 287 भारतीय अभी लापता हैं, जबकि 88 को सुरक्षित निकाला जा चुका है। चार भारतीयों को रसुवा की हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग से बचाया गया है।
इसके अलावा 128 भारतीय मूल के लोग भी संपर्क से बाहर हैं। भारत ने मृतकों की पहचान में मदद के लिए छह फोरेंसिक टीमों को नेपाल भेजने का फैसला किया है। साथ ही सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष तकनीकी टीम भी भेजी गई है।
भारतीयों की संख्या को लेकर इससे पहले अलग-अलग आंकड़े सामने आए थे। आजतक ने 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर दी थी। बाद के MEA अपडेट में यह संख्या 287 बताई गई।
भारत ने बढ़ाई मदद
भारत नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान में लगातार मदद कर रहा है। राहत सामग्री के साथ तकनीकी और फोरेंसिक टीमें भेजी गई हैं। नेपाल ने भी भारत समेत दूसरे देशों से तकनीकी सहायता मांगी है, खासकर सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, संचार व्यवस्था बहाल करने और शवों की पहचान के लिए।
राहत मिली, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं
फिलहाल झील का पानी घटने से दूसरी बड़ी बाढ़ का तत्काल खतरा कम हुआ है, लेकिन दूसरी झील और अस्थिर पहाड़ी इलाकों के कारण नेपाल अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। प्रशासन की प्राथमिकता अब हजारों लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान और दुर्गम इलाकों तक राहत पहुंचाना है। नेपाल की इस त्रासदी में जहां मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, वहीं 287 भारतीयों का अब तक लापता होना भारत के लिए भी इस आपदा को बेहद गंभीर मानवीय संकट बना रहा है।
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