चुनाव आयोग पर बढ़ता दबाव : सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होगी सुनवाई, सड़कों पर भी तेज हुआ विरोध

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद मंगलवार को एक साथ अदालत और सड़कों पर दिखाई दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के फैसलों और उसकी निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली याचिका को अगले सप्ताह सुनने पर सहमति दी है। दूसरी ओर, विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर दिल्ली समेत कई राज्यों में विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन जारी रहे। दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: September 29, 2026 11:51 pm

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले दूसरे दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की मंजूरी के बिना लिए गए। याचिका में चुनाव आयोग के बहु-सदस्यीय स्वरूप और उसके सामूहिक निर्णय लेने की संवैधानिक तथा कानूनी व्यवस्था की व्याख्या की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका को अगले सप्ताह सुनने पर सहमति दी है।

14 कथित आपत्तियों ने बढ़ाया विवाद

विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की वह रिपोर्ट भी है जिसमें दावा किया गया कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े करीब 14 मामलों में आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया और आयोग की डिजिटल व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

याचिका में इसी तरह के कथित मतभेदों को आधार बनाकर यह सवाल उठाया गया है कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता ने ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य करने से रोकने सहित कई राहतों की मांग की है। हालांकि, इन सभी आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला अभी नहीं हुआ है।

आज भी सड़कों पर विरोध

अदालत में मामला पहुंचने के साथ ही चुनाव आयोग के खिलाफ राजनीतिक विरोध भी जारी रहा। मंगलवार को वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने, SIR रोकने और जिन पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उन्हें बहाल करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

इससे एक दिन पहले दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया था। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च रोका और कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों ने CEC के इस्तीफे और मतदाता सूची पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। दिल्ली के अलावा हैदराबाद और विजयवाड़ा में भी कांग्रेस ने प्रदर्शन किए। वहां पार्टी ने SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और CEC के इस्तीफे की मांग उठाई।

विपक्ष की रणनीति भी हो रही है तेज

विवाद अब केवल प्रदर्शनों तक सीमित नहीं है। इंडिया टुडे के अनुसार विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नए प्रयास की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी इस मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा हो रही है। विपक्षी दलों की एक बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में होने की संभावना बताई गई है, जिसमें संयुक्त रणनीति पर विचार किया जाना है। महाराष्ट्र में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने भी चुनाव आयोग के खिलाफ 4 अक्टूबर को संयुक्त विरोध मार्च की घोषणा की है।

चुनाव आयोग का क्या कहना है?

चुनाव आयोग ने अपने ऊपर लगाए जा रहे संस्थागत संकट या कामकाज ठप होने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार या टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं और SIR से जुड़े उसके आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से जारी किए गए हैं। आयोग ने Form 6 में बदलावों का भी बचाव किया है और कहा है कि उसकी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है। यानी एक तरफ याचिका में चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर सवाल है, दूसरी तरफ आयोग इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने फैसलों को सामूहिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बता रहा है।

अब नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर

इस पूरे घटनाक्रम में मंगलवार का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट का अगले सप्ताह याचिका सुनने पर सहमत होना है। अदालत के सामने अब यह सवाल आएगा कि बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई कानूनी आपत्तियों पर सुनवाई किस सीमा तक की जा सकती है। फिलहाल अदालत ने आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। लेकिन SIR को लेकर राजनीतिक विरोध, आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंची याचिका—इन तीनों घटनाक्रमों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

ये भी पढ़ें :-ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन, 14 लिखित आपत्तियों से घिरा चुनाव आयोग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *