विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों का जवाब चुनाव आयोग नहीं दे रहा है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष अब सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आ गया है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि बहु-सदस्यीय आयोग में अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है और उसके सभी फैसले अंततः संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए गए।
एक दिन में बदल गया विरोध का पूरा स्वरूप
बुधवार की सुबह से ही विपक्षी खेमे में आगे की रणनीति को लेकर हलचल शुरू हो गई थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों को लंच पर बुलाया। बैठक के बाद राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर धरना देने की घोषणा की। विपक्ष की ओर से कहा गया कि लगभग 300 सांसदों ने इस विरोध में शामिल होने की इच्छा जताई है। इसके बाद विपक्षी सांसद बसों में सवार होकर जंतर-मंतर की ओर बढ़े। लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस के अनुसार जंतर-मंतर पर धरने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है और इसके लिए आवेदन कम से कम दस दिन पहले देना होता है। विपक्षी नेताओं ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और सड़क पर ही बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इसके बाद स्थिति तेजी से बदल गई। राहुल गांधी और अन्य सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लेना शुरू कर दिया। प्रियंका गांधी वाड्रा भी सड़क पर बैठ गईं। कुछ महिला सांसदों के सड़क पर लेटकर विरोध करने की तस्वीरें सामने आईं। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ बल प्रयोग किया गया। ये आरोप विपक्षी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं।
राहुल गांधी का ऐलान—’FIR मेरे लिए मेडल’
हिरासत से पहले राहुल गांधी ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर भी तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ जितनी FIR दर्ज होंगी, वे उतना ही आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य 100 FIR तक पहुंचना है और उनके लिए प्रत्येक FIR एक ‘मेडल’ है। यह बयान उस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में आया जिसमें मंगलवार के प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान वे बिना अनुमति आकाशवाणी भवन परिसर में दाखिल हुए थे। मंगलवार को विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। निर्वाचन सदन से कुछ दूरी पहले पुलिस ने बैरिकेड लगा दिए। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कुछ नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं धरना दिया। कई घंटे चले इस विरोध के बाद पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया था।
अब आंदोलन दिल्ली से बाहर जाएगा
बुधवार के घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने आंदोलन को राजधानी से बाहर ले जाने का फैसला किया है। कांग्रेस ने 8 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर तक प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की गई है। कांग्रेस ने 7 अक्टूबर को ‘ब्लैक डे’ के तौर पर मनाने की बात भी कही है। इसका मतलब साफ है कि अब मामला सिर्फ दिल्ली में विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहने वाला। कांग्रेस इसे देशव्यापी राजनीतिक अभियान का रूप देने की तैयारी में है। अगले चरण में प्रदेश कांग्रेस संगठन, जिला इकाइयां और स्थानीय कार्यकर्ता SIR तथा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के मुद्दे पर प्रदर्शन करेंगे।
चुनाव आयोग पर सवाल, आयोग का अपना जवाब
विपक्ष की नाराजगी की तत्काल पृष्ठभूमि चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक रिपोर्ट है। इसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब दस महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई। विपक्ष ने इसे चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल के रूप में पेश किया है। लेकिन चुनाव आयोग ने इन मतभेदों की अलग व्याख्या की है। आयोग के अनुसार तीन सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय होना असामान्य नहीं है और उसके निर्णय अंततः निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए गए। इसलिए इस पूरे विवाद में विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग का जवाब दोनों अलग-अलग दावों के रूप में सामने हैं।
विपक्षी एकता के बीच भी दिखी दरार
दिल्ली में विपक्ष का आंदोलन जहां तेज हुआ, वहीं INDIA ब्लॉक की एकजुटता पर भी सवाल उठे। बुधवार को खड़गे की ओर से आयोजित लंच बैठक में समाजवादी पार्टी की गैरमौजूदगी चर्चा में रही। खास बात यह है कि मंगलवार के चुनाव आयोग मार्च में अखिलेश यादव और सपा के नेता सक्रिय रूप से शामिल हुए थे। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि बैठक के लिए सूचना कम समय में दी गई थी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR और मतदाता सूची का मुद्दा सीधे चुनावी राजनीति से जुड़ चुका है।
ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा भी टला
इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का 7 और 8 अक्टूबर का छत्तीसगढ़ दौरा भी स्थगित कर दिया गया। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से दौरा स्थगित किए जाने की जानकारी दी गई और कहा गया कि नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी। हालांकि दौरा स्थगित करने का कारण ‘अपरिहार्य कारण’ बताया गया है और इसे दिल्ली के राजनीतिक घटनाक्रम से आधिकारिक रूप से नहीं जोड़ा गया है।
दो दिन में आंदोलन ने बदली राजनीतिक तस्वीर
मंगलवार को संसद से चुनाव आयोग तक मार्च, आकाशवाणी भवन में धरना, FIR और हिरासत। बुधवार को जंतर-मंतर जाने की कोशिश, पुलिस द्वारा रास्ता रोका जाना, राहुल और प्रियंका गांधी की फिर हिरासत और उसके बाद देशव्यापी आंदोलन का ऐलान।यानी महज 48 घंटे में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध संसद परिसर से निकलकर दिल्ली की सड़कों तक पहुंच गया है और अब राज्यों की ओर बढ़ने की तैयारी में है।
विपक्ष इसे मतदाता अधिकार और चुनावी पारदर्शिता का सवाल बता रहा है। भाजपा और चुनाव आयोग विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं करते और चुनावी प्रक्रिया तथा SIR को नियमों के तहत चलने वाली प्रक्रिया बताते हैं।लेकिन बुधवार की सबसे बड़ी राजनीतिक तस्वीर यही रही—राहुल गांधी दूसरी बार हिरासत में गए, विपक्षी सांसदों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया और कांग्रेस ने अगले ही दिन देशभर में सड़क पर उतरने का ऐलान कर दिया। अब 8 अक्टूबर बताएगा कि दिल्ली में शुरू हुआ यह टकराव कितने राज्यों तक पहुंचता है।
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