उनकी काव्य-प्रतिभा बहु-आयामी थी और उनका व्यक्तित्व भी। वे न केवल मैथिली, हिन्दी और ऊर्दू के मनीषी विद्वान और समर्थ साहित्यकार थे, अपितु भारतीय दर्शन से अनुप्राणित एक राष्ट्रवादी मुसलमान थे। उन्हें भारतीय-दर्शन और वैदिक-साहित्य का ही नहीं, पाली और संस्कृत का भी गहन ज्ञान था। इसीलिए उनकी काव्य-रचनाओं में अनेक पौराणिक-प्रसंग प्रमुखता से आए हैं।
यह बातें रविवार को, आचार्य हाशमी सांप्रदायिक सौहार्द मंच के सौजन्य से, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, आचार्य हाशमी की 14 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति-सह-सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही।
उन्होंने कहा कि आज जब संपूर्ण वसुधा में सांप्रदायिक सौहार्द पर ग्रहण लगा हुआ है, आचार्य हाशमी अत्यंत प्रासंगिक हैं। यह गौरव का विषय है कि आचार्य हाशमी को साहित्य अकादमी (Sahitya Akademi) पुरस्कार से भी विभूषित किया गया था और उन्हें अकादमी का सदस्य भी बनाया गया था। वे मैथिली, हिन्दी और ऊर्दू के मनीषियों के बीच समान रूप से आदर पाते रहे। तीनों भाषाओं में उनके द्वारा रचित 17 ग्रंथ उनके महान साहित्यिक अवदान के परिचायक हैं।
समारोह का उद्घाटन करते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री डा सी पी ठाकुर ने कहा कि आचार्य हाशमी जैसे महापुरुष समाज के लिए आदर्श उदाहरण होते हैं, जिनसे नयी पीढ़ी प्रेरणा पाती है। उनका साहित्य और संदेश हमारी धरोहर हैं। उनकी स्मृतियों को जीवित रखा जाना चाहिए ।
समारोह के मुख्य अतिथि और राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार ने कहा कि आचार्य हाशमी एक प्रतिष्ठित कवि ही नहीं, सांप्रदायिक-सौहार्द के उदाहरण थे। उन्होंने अपने आचरण और साहित्य से सदैव इस विचार को बल देते रहे।
इस अवसर पर, कौलेज ऑफ कौमर्स के प्राचार्य डा इंद्रजीत प्रसाद राय, बी डी कौलेज के प्राचार्य डा विवेकानंद सिंह तथा सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा राम नरेश पंडित ‘रमण’ को ‘आचार्य फ़ज़लुर्रहमान हाशमी स्मृति-सम्मान’ से विभूषित किया गया। इन सभी मनीषियों को, वंदन-वस्त्र, स्मृति-चिन्ह, प्रशस्ति-पत्र तथा 21 सौ रूपए की सम्मान-राशि देकर सम्मानित किया। अतिथियों ने इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार ए.आर. आज़ाद द्वारा लिखित पुस्तक ‘आचार्य हाशमी : जीवनवृत्त और उपलब्धियाँ’ का लोकार्पण भी किया।
सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष जियालाल आर्य, डा शंकर प्रसाद, कुमार अनुपम, विभारानी श्रीवास्तव, तथा आचार्य हाशमी के कवि पौत्र सैयद असद आज़ाद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन में वरिष्ठ कवि डा रत्नेश्वर सिंह, प्रो एहसान शाम, सुनील कुमार, बच्चा ठाकुर, आराधना प्रसाद, ईं अशोक कुमार, विनोद कुमार झा, सदानन्द प्रसाद, डा आर प्रवेश, विद्या चौधरी, डा पुष्पा जमुआर, सुनीता रंजन, डा ऋचा वर्मा, डा मीना कुमारी परिहार, सूर्य कुमार उपाध्याय, इंदु भूषण सहाय आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी काव्य-रचनाओं से समारोह को रसपूर्ण बना दिया।
अतिथियों का स्वागत मंच के अध्यक्ष और पत्रिका ‘दूसरा मत’ के संपादक ए.आर. आज़ाद ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन बाँके बिहारी साव ने किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने किया।
वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र यादव, गोविंद प्रसाद जायसवाल, अजय यादव, डा कैसर जाहिदी, डा चन्द्रशेखर आज़ाद, मो शौक़त अली, डा प्रेम प्रकाश, सतीश आनन्द, अरविन्द कुमार सिंह आदि प्रबुद्धजन समारोह में उपस्थित थे।
ये भी पढ़ें – अति पठनीय हैं प्रेम रंजन अनिमेष के संग्रह ‘जीवन खेल’ की कविताएँ
**neurosharp official**
Neuro Sharp is an advanced cognitive support formula designed to help you stay mentally sharp, focused, and confident throughout your day.
**kerassentials**
Kerassentials is an entirely natural blend crafted with 4 potent core oils and enriched by 9 complementary oils and vital minerals.