करहल की जंग: योगी vs अखिलेश, किसका बजेगा डंका?

उत्तर प्रदेश की करहल विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा और सपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। दिवाली के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद मोर्चा संभालेंगे। दोनों पार्टियां इस चुनाव को आगामी 2027 विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने के रूप में देख रही हैं।

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव
Written By : MD TANZEEM EQBAL | Updated on: October 31, 2024 8:52 pm

Yogi vs Akhilesh करहल विधानसभा सीट, जो कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लोकसभा के लिए चुने जाने पर खाली हुई थी, अब यूपी के उपचुनावों में सबसे अहम सीट बन चुकी है। यहां सपा ने अखिलेश के चचेरे भाई तेज प्रताप यादव को उम्मीदवार बनाया है। नामांकन के दौरान यादव परिवार ने एकजुट होकर समर्थन दिखाया, जिससे सपा ने भाजपा को कड़ी चुनौती देने का संकेत दिया। सपा का लक्ष्य पिछली जीत को बरकरार रखना है, क्योंकि इस सीट पर वह 1993 से लगातार जीतती आ रही है।

भाजपा का आक्रामक प्रचार अभियान
इस उपचुनाव में भाजपा ने कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों में दी है। योगी आदित्यनाथ ने दिवाली के बाद आक्रामक प्रचार अभियान की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री और उनके मंत्रीगण हर सीट पर रैली कर रहे हैं, और यह संदेश देने की कोशिश में हैं कि भाजपा इस बार सपा के “परिवारवाद” के खिलाफ लड़ रही है। भाजपा का मानना है कि जनता परिवारवाद से थक चुकी है और अब वे बदलाव चाहते हैं।

मिल्कीपुर से करहल की ओर मुड़ा ध्यान
पहले भाजपा और सपा दोनों का फोकस मिल्कीपुर सीट पर था, लेकिन सपा विधायक अवधेश प्रसाद की लोकसभा चुनाव जीत के बाद सीट पर चुनाव टलने से करहल पर ध्यान केंद्रित हुआ। करहल पर अब भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है, जहां वे सपा के खिलाफ व्यापक अभियान चला रहे हैं।

Yogi vs Akhilesh

सपा का ‘पीडीए’ फार्मूला और भरोसा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों का समर्थन पाने के लिए ‘पीडीए’ फार्मूला अपनाया है। हालिया लोकसभा चुनाव में भारत गठबंधन की जीत से उत्साहित सपा को भरोसा है कि इस उपचुनाव में भी उन्हें ‘पीडीए’ से पूरा समर्थन मिलेगा। सपा के नेताओं का मानना है कि भाजपा के बार-बार किए जा रहे दौरे दर्शाते हैं कि वे इस चुनाव में असहज महसूस कर रही है।

आमने-सामने की टक्कर
इस चुनाव में दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला होगा। भाजपा जहां अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रयास कर रही है, वहीं सपा अपनी मौजूदा स्थिति को बरकरार रखते हुए यादव परिवार के साथ मिलकर जीत की उम्मीद कर रही है। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा का आक्रामक प्रचार अभियान सफल होता है या सपा का ‘पीडीए’ का फार्मूला करहल में अपनी पकड़ बनाए रखेगा।

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