‘कवि ने कहा’श्रृंखला में पढ़ें कविता संग्रह “चुनी हुई कविताएं :विश्वनाथ प्रसाद तिवारी”

आज की पुस्तक चर्चा में 'कवि ने कहा 'श्रृंखला के अंतर्गत कवि विश्वनाथ प्रसाद तिवारी द्वारा चुनी हुई उनकी अपनी कविताओं का संग्रह है "चुनी हुई कविताएं :विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ". इस संग्रह में हिंदी के प्रातिष्ठित विद्वान कवि, आलोचक ,लेखक की पंचान्यवे कविताएं हैं.

Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: May 28, 2025 10:33 pm

हिंदी भाषा साहित्य और हिंदी कविता के क्षेत्र में विश्वनाथ प्रसाद तिवारी जी का नाम सम्मान से लिया जाता है !उन्होंने हिंदी आलोचना के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण योगदान किया है ! देश के अनेक दर्जनों पुरस्कारों और सम्मानों के अतिरिक्त विश्वनाथ तिवारी जी भारत के प्रसिद्ध सम्मान बिरला फाउंडेशन के” व्यास सम्मान” से भी सम्मानित हैं.

पांच वर्षों तक तिवारी जी साहित्य अकादमी, दिल्ली के अध्यक्ष रहे हैं .अभी विश्वनाथ तिवारी जी साहित्य अकादमी के महतर सदस्य हैं और सन 1978 से अब तक’दस्तावेज’ पत्रिका (गोरखपुर)के संपादक हैं . संग्रह के प्रारंभ में कवि कहते हैं ‘ : ‘..मेरी कविताओं ऐसे शब्द ,बिम्ब या प्रतीक अधिक हैं जो भोगते हुए या जूझते हुए मनुष्य से संबंधित हैं।

मैं गरीब देहाती दुनिया से आया हूँ और मेरे शुरु के बीस वर्ष उस अनाथ साधनहीन मनुष्य के बीच गुज़रे हैं जिसे बार-बार अपमानित होते,यातनाएं सहते देखा है।….’ संग्रह की सभी कविताएं सामान्य मनुष्य के जीवन के संघर्षशील जीवन की व्यथा कथा है. कुछ कविताओं के शीर्षक देखिये :’ लड़ता हुआ आदमी ,बेड़ियों के विरुद्ध ,कल की लड़ाई के लिए, मरते आदमी के साथ साथ, आरा मशीन, कसौटियां ,कलेजा, यमदूत ढूंढ रहे माँ को, रूपकुंवरी, गोरखपुर का भैया,गाय, हाथी, केंचुल, शब्द, आत्मा, रीढ़ , ऊंघता संतरी इत्यादि. शायद आपको अनुमान हो गया होगा कि कवि ने जीवन के प्रत्येक छोटे बड़े अवसर और प्रसंग को अपनी कविता का विषय बनाया है.

एक कविता देखिये : “रीढ़ **** कौन -सा अंग है / आदमी के शरीर में सबसे कीमती/ प्रेममार्गियों ने कहा दिल/ज्ञानमार्गियों ने कहा दिमाग/कर्ममार्गियों ने कहा हाथ/ पर रीढ़ न हो सीधी /तो कैसे बाँएग्स आदमी /कैसे खड़ा होगा वह/ गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध. ” कवि की सारी कविताएं जीवन के स्थापित मान्यताओं ,रिवाजों और मानवीय स्वभाव के विसंगतियों के संबंध में प्रश्न उठाती हैं. कवि की भाषा ,प्रवाह और शब्द विन्यास आकर्षक और प्रभावशाली है. देशज शब्दों का रोचक प्रयोग किया गया है . छपाई सुंदर है .संग्रह पठनीय और संग्रहणीय है .

संग्रह:’चुनी हुई कविताएं :विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

कवि: विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ,प्रकाशक: किताब घर प्रकाशन, मूल्य:रु 90.

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)

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5 thoughts on “‘कवि ने कहा’श्रृंखला में पढ़ें कविता संग्रह “चुनी हुई कविताएं :विश्वनाथ प्रसाद तिवारी”

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