दिल्ली में हाल ही में सत्ता में आई भाजपा सरकार ने उपराज्यपाल (LG) के खिलाफ दर्ज कई कानूनी मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई वाली सरकार ने “गवर्नेंस को प्राथमिकता देने” का फैसला किया है और इसी के तहत यह कदम उठाया गया है।
किस मुद्दों पर दर्ज थे केस?
सूत्रों के मुताबिक, जिन मामलों को वापस लिया जा रहा है, उनमें शामिल हैं:
AAP सरकार और LG के बीच लगातार टकराव
जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार थी, तब उपराज्यपालों नजीब जंग, अनिल बैजल और वीके सक्सेना के साथ कई मुद्दों पर मतभेद देखने को मिले। AAP ने आरोप लगाया था कि LG कार्यालय जानबूझकर सरकारी नीतियों के कार्यान्वयन में बाधा डाल रहा है। वहीं, LG ने AAP सरकार पर सहयोग न करने के आरोप लगाए।
यह टकराव कई बार कोर्ट तक भी पहुंचा। 2020 में दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में वकीलों की नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। AAP नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया था कि LG और केंद्र सरकार ऐसे वकीलों की नियुक्ति कर रही है जो दिल्ली पुलिस के पक्ष में होंगे।
चुनावी हार का बड़ा कारण?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि LG और AAP सरकार के बीच की इस खींचतान का असर दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी पड़ा। फरवरी 2025 में हुए चुनाव में AAP को करारी हार का सामना करना पड़ा और उसकी सीटें घटकर 22 रह गईं। वहीं, भाजपा ने 48 सीटें जीतकर 25 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी की।
DERC और बिजली सब्सिडी का विवाद
AAP सरकार और LG के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) के अध्यक्ष की नियुक्ति भी रहा। AAP को डर था कि अगर केंद्र सरकार DERC पर नियंत्रण कर लेती है, तो उसकी लोकप्रिय बिजली सब्सिडी योजना बंद हो सकती है।
विदेशी शिक्षक प्रशिक्षण विवाद
AAP सरकार ने दिल्ली के शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए फिनलैंड भेजने का प्रस्ताव रखा था, जिसे उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कई शर्तों के साथ मंजूरी दी थी। इस मामले में AAP ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। AAP का कहना था कि LG सरकार के काम में अनावश्यक दखल दे रहे हैं, जबकि LG कार्यालय ने तर्क दिया था कि सरकार को पहले यह साबित करना चाहिए कि ऐसे विदेशी प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कोई लाभ हुआ है या नहीं।
नई सरकार का क्या है रुख?
सूत्रों के अनुसार, भाजपा सरकार ने इन सभी मामलों को खत्म करने का फैसला किया है ताकि दिल्ली सरकार, उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “हमारा ध्यान अब सुशासन पर है, विवादों में उलझने से कोई फायदा नहीं।”
भाजपा सरकार के इस फैसले को दिल्ली में प्रशासनिक गतिरोध को खत्म करने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या LG और सरकार के बीच का रिश्ता वास्तव में बेहतर होता है या यह सिर्फ एक राजनीतिक रणनीति है।
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