डोनाल्ड ट्रंप को लगा सबसे बड़ा झटका, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद किया टैरिफ

अमेरिका की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court of the United States) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए व्यापक वैश्विक शुल्क (टैरिफ) को असंवैधानिक करार देते हुए कहा है कि कार्यपालिका आपातकालीन प्रावधानों के नाम पर कराधान संबंधी अधिकार अपने हाथ में नहीं ले सकती। 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति पर अब तक का सबसे बड़ा न्यायिक प्रहार माना जा रहा है।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: February 21, 2026 12:33 am

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (International Emergency Economic Powers Act—IEEPA), 1977 का उपयोग व्यापक वैश्विक शुल्क लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। संविधान के तहत कर और सीमा शुल्क निर्धारण का अधिकार विधायिका, यानी कांग्रेस के पास निहित है। अदालत ने कहा कि आपातकालीन शक्तियों की व्याख्या असीमित नहीं हो सकती और उन्हें स्पष्ट विधायी मंशा के अनुरूप ही लागू किया जाना चाहिए।

वैश्विक व्यापार पर असर

ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए अतिरिक्त शुल्क से कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई थीं। इन शुल्कों के कारण आपूर्ति शृंखलाओं में अस्थिरता, लागत वृद्धि और व्यापारिक तनाव बढ़ा था। अदालत के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता की उम्मीद जताई जा रही है। यदि निर्णय के अनुरूप शुल्क निरस्त होते हैं तो द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं को नई गति मिल सकती है।

यह फैसला संरक्षणवादी नीतियों पर भी व्यापक बहस को जन्म दे सकता है। वैश्विक व्यापार व्यवस्था में यह संकेत गया है कि एकतरफा आर्थिक कदमों पर न्यायिक निगरानी संभव है और संवैधानिक ढांचे से बाहर जाकर व्यापार नीति नहीं बनाई जा सकती।

भारत के लिए संभावित प्रभाव

भारत के इस्पात, एल्युमीनियम और कुछ इंजीनियरिंग उत्पाद के निर्यात अमेरिका के अतिरिक्त शुल्क से प्रभावित रहे हैं। फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों को राहत की संभावना दिख रही है। यदि शुल्क हटाए जाते हैं या उनकी समीक्षा होती है तो भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत हो सकती है। भारत ऐसे समय में वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी बाजार में संभावित राहत से निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को बल मिल सकता है और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में नई सकारात्मकता आ सकती है।

आगे क्या ?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अब केंद्र सरकार के समक्ष कई विकल्प हैं। प्रशासन पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है या कांग्रेस के माध्यम से स्पष्ट विधायी प्रावधान लाने की कोशिश कर सकता है। साथ ही यह भी संभव है कि व्यापार नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा या अन्य वैधानिक आधारों के तहत पुनर्संगठित किया जाए।

एक अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि पहले से वसूले गए शुल्क का क्या होगा। यदि अदालत के निर्णय के अनुरूप उन्हें अवैध ठहराया जाता है, तो संभावित वापसी (रिफंड) या समायोजन की प्रक्रिया जटिल हो सकती है और इसके वित्तीय प्रभाव भी व्यापक होंगे।

राजनीतिक स्तर पर यह निर्णय कार्यपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों के संतुलन को फिर रेखांकित करता है। आर्थिक दृष्टि से यह वैश्विक व्यापारिक वातावरण में स्थिरता का अवसर बन सकता है। यह फैसला केवल एक व्यापारिक विवाद का समाधान नहीं, बल्कि संवैधानिक सीमाओं और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा निर्णायक मोड़ है—जिसके प्रभाव अमेरिका की नीति निर्माण प्रक्रिया से लेकर भारत सहित दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं तक दिखाई देंगे।

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3 thoughts on “डोनाल्ड ट्रंप को लगा सबसे बड़ा झटका, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद किया टैरिफ

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