विधान सौधा में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने डी.के. शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे वरिष्ठ नेताओं ने समर्थन दिया। इसके बाद सभी विधायकों ने ध्वनिमत से उन्हें अपना नेता चुन लिया। बैठक समाप्त होते ही कांग्रेस नेतृत्व ने औपचारिक घोषणा कर दी और राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार गठन का दावा भी पेश कर दिया।
कांग्रेस के भीतर यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि एक पुराने राजनीतिक वादे की पूर्ति के रूप में भी देखा जा रहा है। मई 2023 में विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों दावेदार थे। उस समय पार्टी नेतृत्व ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाकर विवाद को शांत किया था। तभी से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रही कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई वर्ष के कार्यकाल का समझौता हुआ है। हालांकि कांग्रेस ने कभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन अब सत्ता हस्तांतरण ने उन चर्चाओं को लगभग सही साबित कर दिया है।
सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद बेंगलुरु और नई दिल्ली में लगातार चली बैठकों में नेतृत्व परिवर्तन की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। कांग्रेस हाईकमान की सहमति मिलने के बाद शनिवार को विधायक दल की बैठक बुलाई गई, जिसमें शिवकुमार के नाम पर सर्वसम्मति बन गई।
राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिवकुमार को संगठन का मजबूत रणनीतिकार और जमीनी नेता माना जाता है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के पीछे उनकी संगठनात्मक भूमिका को प्रमुख कारणों में गिना जाता है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनेगा तथा आगामी लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को इसका लाभ मिलेगा।
शपथ ग्रहण समारोह 3 जून को बेंगलुरु में आयोजित होगा। समारोह को अपेक्षाकृत सादगीपूर्ण रखने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही नए मंत्रिमंडल के गठन और संभावित फेरबदल को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने की संभावना जताई जा रही है।
कर्नाटक में यह सत्ता परिवर्तन केवल मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने भर का मामला नहीं है। इसे कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संतुलन, क्षेत्रीय समीकरणों और भविष्य की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि पूरे देश की नजरें अब 3 जून पर टिकी हैं, जब डी.के. शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता की कमान संभालेंगे और कांग्रेस के बहुचर्चित सत्ता-साझेदारी अध्याय का नया पन्ना खुल जाएगा।
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