कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज, 28 मई की बैठक पर टिकी नजर

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया (Siddaramaiah) और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार (D. K. Shivakumar) की दिल्ली में पार्टी नेतृत्व के साथ हुई लंबी बैठकों के बाद राज्य की राजनीति में सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि 28 मई को बेंगलुरु में होने वाली बैठक के बाद बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: May 27, 2026 12:08 am

दिल्ली में हुई बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge), राहुल गांधी (Rahul Gandhi), केसी वेणुगोपाल (K. C. Venugopal) और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) मौजूद थे। बैठक के तुरंत बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल (K. C. Venugopal) ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि चर्चा केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों पर केंद्रित थी। उन्होंने साफ कहा कि मुख्यमंत्री बदलने को लेकर चल रही अटकलों में “कोई सच्चाई नहीं” है।

इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं थमी नहीं हैं। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में सहज नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता तलाश रहा है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया (Siddaramaiah) 28 मई को बैठक के बाद इस्तीफा दे सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दरअसल, 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्दारमैया (Siddaramaiah) और डी. के. शिवकुमार (D. K. Shivakumar) के बीच लंबी रस्साकशी चली थी। उसी समय सत्ता साझेदारी के कथित “ढाई-ढाई साल” फॉर्मूले की चर्चा सामने आई थी। हालांकि पार्टी ने कभी सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी समझौते की पुष्टि नहीं की। अब सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है।

उधर, डी. के. शिवकुमार (D. K. Shivakumar) ने भी नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर सीधा जवाब देने से बचते हुए हाल में कहा था कि “समय जवाब देगा।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला।

कांग्रेस के सामने राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी मानी जा रही है। सिद्दारमैया (Siddaramaiah) राज्य में ओबीसी समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं और पार्टी उनके सामाजिक आधार को लेकर सतर्क है। इसी वजह से नेतृत्व परिवर्तन का फैसला आसान नहीं माना जा रहा। फिलहाल कांग्रेस की ओर से किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन दिल्ली बैठकों के बाद जिस तरह राजनीतिक हलचल बढ़ी है, उससे 28 मई की बैठक पर पूरे राज्य की नजरें टिक गई हैं।

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