भगवान शिव ‘विश्वास’ के स्वरूप हैं। माता पार्वती ‘श्रद्धा-रूपिणी’ हैं। अर्थात दोनों श्रद्धा और विश्वास हैं। वस्तुतः श्रद्धा और विश्वास ही शिव-पार्वती हैं। ईश्वर और सदगुरु के प्रति श्रद्धा और विश्वास रखने वाले व्यक्ति और साधक को ही परमात्मा की शक्ति और कृपा प्राप्त होती है। इसके विना न तो भक्ति ही प्राप्त हो सकती है न शक्ति और कृपा ही। यह बातें बुधवार को स्थानीय ‘अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर’ में आध्यात्मिक संस्था अंतर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि- महोत्सव में अपना आशीर्वचन देती हुईं संस्था की अध्यक्ष और ब्रह्मनिष्ठ सदगुरुमाता माँ विजया जी ने कही।
माताजी ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास का संबंध मन से है। मन बहुत शक्तिशाली किंतु चंचल है। यही सभी समस्याओं का कारण भी है और इसी में निदान भी है। मन को साधने से शक्ति आती है और श्रद्धा और विश्वास भी। जैसे-जैसे विश्वास दृढ़ होता है, वैसे-वैसे मन भी सधने लगता है। इस्सयोग में मन को साधने की विधि और शक्ति है।
माता जी ने कहा कि मनुष्य चैतन्य प्राणी है। चेतना सदैव साक्षी भाव में रहता है। जो साधक मन को साध लेता है, वह आध्यात्मिक शक्तियों से पूर्ण होने लगता है। इसके लिए प्रति दिन सूक्ष्म-आंतरिक साधना का अभ्यास आवश्यक है। श्रद्धा और विश्वास के साथ साधना के नियमित अभ्यास से मन के समस्त मल दूर होते जाते हैं और आत्मा प्रकाशित होने लगती है।
यह जानकारी देते हुए संस्था के संयुक्त सचिव डा अनिल सुलभ ने बताया कि इस अवसर पर विश्व के विभिन्न स्थानों से आए दो दर्जन इस्सयोगियों ने अपने उद्गार भी व्यक्त किए, जिनमे लंदन से आयीं चिकित्सक डा द्राशनिका पटेल सोलंकी, सिंगापुर से आयीं डा गिरिजा शंकर, थाईलैंड से आए अजय पाण्डेय, सरोज गुटगुटिया, माया साहू, प्रणव, आर के श्रीवास्तव, कुमार पीयूष, कविता शंकर, अरविंद कुमार, राज करण, संतोष कुमार, अधिवक्ता वीरेंद्र राय, चंदन कुमार, कविता शंकर, सीमा कुमारी, लालती देवी, कामिनी कौशल, पिंकी कुमारी, माला कुमारी, अनिल कुमार, गोपी साह, के नाम सम्मिल्लित हैं। इन इस्सयोगियों ने अपनी अनुभूतियों के आधार पर बताया कि किस प्रकार इस्सयोग से जुड़ने के पश्चात उनके जीवन में चमत्कारी परिवर्तन हुए और अविश्वसनीय से लगने वाले अलौकिक कार्यों की सिद्धि हुई। कार्यक्रम का संचालन संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा और संयुक्त सचिव (मुख्यालय) ईं उमेश कुमार ने किया।
कार्यक्रम का आरंभ पूर्वाहन साढ़े दस बजे माताजी के निदेशानुसार, संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा तथा संयुक्त सचिव डा अनिल सुलभ ने संयुक्त रूप से दीप-प्रज्वलन कर किया। संयुक्त सचिव छोटे भैया संदीप गुप्ता ने भगवान शिव और सदगुरु-गुरुमाँ के चित्रों पर माल्यार्पण किया। माताजी ने विविध मंत्रों और रुद्राष्टकम के साथ सामूहिक शिव-स्तुति कर महोत्सव को पूर्णता प्रदान की। इसके पश्चात एक घंटे का अखंड भजन-संकीर्तन संपन्न हुआ।
महाप्रसाद के पश्चात इस्सयोग की ‘शक्तिपात-दीक्षा’ आयोजित हुई, जिसमें सदगुरुमाँ ने आठ सौ से अधिक नव-जिज्ञासुओं को इस्सयोग की सूक्ष्म साधना आरंभ करने के लिए आवश्यक दीक्षा प्रदान की। माताजी ने नियमित साधना करने वाले योग्य इस्सयोगी-साधक-साधिकाओं को, दिव्य-ऊर्जा से रोगों के उपचार करने की शक्ति प्रदान करने हेतु ‘दिव्य-उपचार की दीक्षा’ भी प्रदान की। संध्या में संकीर्तन और जगत-कल्याण के लिए ‘ब्रह्माण्ड-साधना’ के पश्चात रात्रि के महाप्रसाद के साथ यह दिव्य-महोत्सव संपन्न हुआ।
इस अवसर पर, बहन संगीता झा, लक्ष्मी प्रसाद साहू, दीनानाथ शास्त्री, अनंत कुमार साहू, शिवम् झा, नीना दूबे गुप्ता, काव्या सिंह झा, वंदना वर्मा, सी एल प्रसाद, दिव्या झा, कपिलेश्वर मण्डल, सतीश प्रसाद, किरण प्रसाद, मंजू देवी, चौरसिया चंद्रशेखर आज़ाद, मनोज कुमार, संजय कुमार, नीकेश कुमार, अविनाश कुमार राजेश , धनंजय कुमार, भूपेन्द्र कुमार, मनोहर कुमार , रामरूप प्रसाद , रामरतन प्रसाद, अशोक कुमार,धर्मेंद्र कुमार सिंह आदि बड़ी संख्या में संस्था के अधिकारी, कार्यसमिति के सदस्य और स्वयंसेवक निरंतर सक्रिय रहे। समारोह में देश विदेश के पाँच हज़ार से अधिक इस्सयोगियों ने भाग लिया।
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