गैस संकट से देश में हाहाकार के बीच राहत, होर्मुज में ईरान ने भारतीय जहाजों को दिया रास्ता

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत के घर-घर तक महसूस किया जा रहा है। देश के लगभग हर राज्य में रसोई गैस को लेकर हाहाकार की स्थिति बन गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लोग खाली सिलेंडर लेकर घंटों लाइन में खड़े हैं, लेकिन कई जगहों पर इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहे। तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति या तो बेहद कम कर दी है या कई जगहों पर अस्थायी तौर पर रोक दी है। ऐसे में भारतीयों के लिए एक राहत भरी खबर है। ईरान ने गैस लेकर आ रहे दो भारतीय जहाजों को पुरानी दोस्ती का हवाला देकर भारत आने का रास्ता दे दिया है।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: March 13, 2026 11:59 pm

गैस संकट का असर दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों में साफ दिखाई देने लगा है। रेस्तरां और ढाबों में पके हुए खाने के दाम बढ़ गए हैं। स्ट्रीट फूड की कई दुकानें गैस की कमी के कारण बंद नजर आ रही हैं, जबकि कई दुकानदारों ने अपने मेन्यू से कई आइटम हटा दिए हैं या कीमतें बढ़ा दी हैं। इसी बीच भारत के लिए राहत भरी खबर भी सामने आई है। Iran ने भारत को अपना पुराना दोस्त बताते हुए रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का संकेत दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी गई है। अगर यह व्यवस्था जारी रहती है तो भारत में एलपीजी की सप्लाई पर बना दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है।

दुनिया की सबसे अहम ऊर्जा ‘चोक प्वाइंट’

Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री रास्ता है। इसे दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा “चोक प्वाइंट” कहा जाता है। दुनिया के कुल तेल और गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सामान्य दिनों में हर दिन करीब सौ बड़े तेल और गैस जहाज यहां से आते-जाते हैं। यही वजह है कि इस रास्ते पर जरा-सी भी सैन्य हलचल वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला देती है।

युद्ध के कारण समुद्र में बड़ी संख्या में जहाज फंसे

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य टकराव के बाद इस समुद्री रास्ते पर आवाजाही लगभग ठप हो गई है। फारस की खाड़ी और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में बड़ी संख्या में तेल, गैस और कंटेनर जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं। इनमें कई देशों के जहाज शामिल हैं। भारत के भी कई जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए बताए जाते हैं, जिनमें तेल और गैस से जुड़े टैंकर भी शामिल हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर भारी दबाव पड़ गया है।

समुद्र में ईरान की सख्त सैन्य निगरानी

युद्ध के बाद ईरान ने इस पूरे समुद्री इलाके में सुरक्षा और सैन्य निगरानी कड़ी कर दी है। ईरानी नौसेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जहाज लगातार गश्त कर रहे हैं। कई रिपोर्टों में समुद्र में माइन बिछाने, ड्रोन निगरानी और मिसाइल तैनाती जैसी तैयारियों की भी बात कही गई है। इसी कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाज इस रास्ते से भेजना फिलहाल टाल दिया है।

जहाजों पर हमले से बढ़ी दहशत

युद्ध शुरू होने के बाद इस क्षेत्र में कई जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों के बाद जहाज मालिकों और बीमा कंपनियों में चिंता बढ़ गई है। कई जहाजों को खाड़ी के बाहर ही रोक दिया गया है। इससे समुद्र में जहाजों की लंबी कतार लग गई है और ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।

तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार

इस पूरे संकट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ा है। युद्ध और सप्लाई बाधित होने के डर से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल और गैस की बढ़ती कीमतों का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और महंगाई पर पड़ सकता है।

ऐसे हालात में ईरान द्वारा भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति देने की खबर भारत के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह व्यवस्था बनी रहती है तो भारत में एलपीजी की सप्लाई पर बना तत्काल दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है, हालांकि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता फिलहाल बनी हुई है।

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