JNU में आपत्तिजनक नारेबाजी पर FIR दर्ज, निष्कासन की तैयारी

देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवाद के केंद्र में है। विश्वविद्यालय परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक और भड़काऊ नारों को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए हैं। मामले में दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और प्राथमिकी (FIR) के बाद जांच शुरू कर दी गई है।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: January 7, 2026 2:19 pm

JNU की यह घटना 5 जनवरी की रात की बताई जा रही है, जब कैंपस में एक कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों द्वारा विवादित नारे लगाए गए। नारेबाजी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां विश्वविद्यालय की आचार संहिता का उल्लंघन हैं और इससे परिसर की शांति, सौहार्द और अकादमिक वातावरण प्रभावित होता है।

प्रशासन का सख्त संदेश

JNU प्रशासन ने आधिकारिक बयान में कहा कि विश्वविद्यालय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है, लेकिन घृणा, हिंसा या भड़काऊ भाषा को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ
— निलंबन,
— निष्कासन (Expulsion),
— और स्थायी रूप से विश्वविद्यालय से प्रतिबंध (Permanent Debarment)
जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन ने यह भी कहा कि JNU “नफरत की प्रयोगशाला नहीं बन सकता” और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई में पूरा सहयोग किया जाएगा।

पुलिस जांच शुरू

विश्वविद्यालय की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस वायरल वीडियो, कार्यक्रम के आयोजकों और नारेबाजी में शामिल छात्रों की पहचान कर रही है। कानून व्यवस्था भंग करने और आपत्तिजनक भाषण से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

छात्र संघ का पक्ष

इस बीच JNUSU (छात्र संघ) ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। छात्र संघ का कहना है कि नारे सरकार की नीतियों और विचारधाराओं के विरोध में थे और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देखा जाना चाहिए। JNUSU ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उछालकर अन्य सवालों से ध्यान भटकाया जा रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने नारेबाजी को “अस्वीकार्य और देशविरोधी मानसिकता” करार दिया, जबकि विपक्ष के कुछ नेताओं ने संयम बरतने और संवैधानिक अधिकारों की बात कही है। JNU में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुशासन की सीमाओं पर बहस को केंद्र में ले आया है। फिलहाल, सभी की नजरें पुलिस जांच और विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह तय माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आने वाले दिनों में कठोर फैसले लिए जा सकते हैं।

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