केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी ने 26 अप्रैल को दूसरे चरण और उसके बाद शेष 5 चरणों में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया दिया है। चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए पार्टी ने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर पार्टी के पार्षदों, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों को नया टास्क दिया है। इन सभी को मतदान के दिन मतदाताओं को फोन कर उन्हें वोट देने के लिए प्रेरित करने का काम सौंपा है।
कार्यकर्ता से लेकर सांसद तक को मिला वोटर को मतदान के लिए प्रेरित करने का निर्देश
सभी को रिपोर्ट करनी होगी कि उन्होंने चुनाव के दिन फोन कर वोट देने के लिए प्रेरित किया…उसका डाटा भी पार्टी के पास देना होगा….बता दें कि पहले चरण में बिहार समेत हिंदी पट्टी के राज्यों में कम वोटिंग से बीजेपी की चिंता बढ़ी है। माना जा रहा है बीजेपी का जो कोर वोटर है, वो मतदान के लिए बहुत कम संख्या में निकला है। पीएम मोदी की अपील के बाद भी बीजेपी का कोर वोटर का बूथ पर नहीं पहुंचना कहीं न कही पार्टी के मिशन 400 पार के लिए सेटबैक है। हालांकि, अभी पहला चरण ही संपन्न हुआ है।
हिन्दी भाषी राज्यों में कम वोटिंग है बीजेपी के लिए चिंता का विषय
बता दें की 19 अप्रैल को 21 राज्यों की 102 सीटों पर हुए चुनाव में 64 फीसदी ही मतदान हुआ जो पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले 6 फीसदी कम है। बीजेपी की आक्रमक प्रचार शैली से पिछले दो लोकसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत तेजी से बढ़ा था, लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी शासित राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार में कम वोटिंग होना बीजेपी के लिए परेशानी का सबब है। चुनाव के लिहाज से सबसे ज्यादा जागरूक माना जाना वाले बिहार में पूरे देश में सबसे कम वोटिंग 47 फीसदी हुई जबकि जबसे ज्यादा मतदान त्रिपुरा में 80 फीसदी और ममता दीदी के गढ़ बंगाल में 78 फीसदी मतदान हुआ है। हिंदी पट्टी में वोटिंग के नए ट्रेंड बीजेपी के खिलाफ विपक्ष के इस नारे को बल मिल रहा है- दक्षिण में साफ और उत्तर में हाफ….आने वाले 6 चरणों में मतदान का यही ट्रेंड रहा तो बीजेपी के लिए दिल्ली की सत्ता में वापसी की राह आसान नहीं होगी।
कम वोटिंग पर चुनाव विश्लेषक भी हैरान
वोटिंग के नए ट्रेंड को लेकर जहां बीजेपी में मंथन हो रहा और नए टास्क कार्यकर्ताओं नेताओं को दिए जा रहे हैं. वहीं चुनाव विश्लेषक भी हैरान और परेशान हैं….चुनाव विश्लेषक कम वोटिंग प्रतिशत को मतदाता की उदासीनता बता रहे तो कई लोग गर्मी और शादी विवाह के मौसम को बड़ी वजह बता रहे हैं। कई विश्लेषक चुनाव में कोई मुद्दा नहीं बनने को लेकर भी मतदाताओं में उदासीनता की वजह बता रहे हैं। पिछले चुनाव के जैसा ही इसबार का चुनाव प्रचार दिखर रहा। जमीन पर कहीं भी चुनाव जैसा माहौल नहीं है…सिर्फ टीवी और सोशल मीडिया पर चुनाव दिख रहा है। राजनीतिक पार्टियां भी मतदाताओं में चुनाव को लेकर उत्सुकता नहीं जगा पा रही हैं, लिहाजा वोटिंग प्रतिशत नीचे जा रहा है। वोटिंग प्रतिशत गिरने से विपक्ष में कोई हलचल नहीं है, जबकि बीजेपी ज्यादा परेशान दिख रही है।
बस्तर में हुई थी 71 फीसद वोटिंग, मोदी की रैली के बाद भी 64 फीसद ही पहुंचा
इसका अंदाजा इस बात से भी लग रहा है कि छत्तीसगढ़ स्थित बस्तर में 64 फीसदी मतदान हुआ जबिक पिछले चुनाव में 71 फीसदी वोटिंग हुई थी। 8 अप्रैल को पीएम मोदी की बस्तर में रैली के बाद भी वोटिंग प्रतिशत का गिरना बीजेपी के लिए चौंकाने वाली घटना है। छत्तीसगढ़ की शेष बची सीटों पर मतदान को लेकर बीजेपी के चाणक्य अमित शाह रविवार को रात 9 बजे रायपुर पहुंचे। यहां उन्होंने देर रात तक पार्टी के बड़े नेताओं के साथ शेष सीटों पर मतदान को लेकर मंथन किया और पार्टी के नेताओं को ज्यादा से ज्यादा वोटरों को बूथ पर लाने का निर्देश दिया।
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