कपिला वात्स्यायन पर स्मृति व्याख्यान और अनूठी प्रदर्शनी का आयोजन

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के (आईजीएनसीए) ‘कला निधि विभाग’ द्वारा 29 दिसंबर, 2025 को शाम 4:00 बजे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के समवेत सभागार में डॉ. कपिला वात्स्यायन स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया जा रहा है, जिसका शीर्षक है “आत्मबोध से विश्वबोध”। इस अवसर पर गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. भाग्येश झा सभा को संबोधित करेंगे।

Written By : डेस्क | Updated on: December 26, 2025 10:56 pm

इस सत्र की अध्यक्षता आईजीएनसीए ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय करेंगे। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी इस स्मृति व्याख्यान में स्वागत भाषण प्रस्तुत करेंगे और कला निधि विभाग के प्रमुख और डीन (प्रशासन) प्रो. रमेश चंद्र गौर कार्यक्रम का परिचय देंगे।

स्मृति व्याख्यान से पहले, डॉ. कपिला वात्स्यायन संग्रह से ली गई कृतियों की प्रदर्शनी “अभिव्यक्ति – एक दूरदर्शी के संग्रह से करघे की कथाएँ” का शुभारम्भ होगा। यह प्रदर्शनी भारत के सबसे प्रतिष्ठित विद्वानों, सांस्कृतिक विचारकों और संस्था-निर्माताओं में से एक डॉ. कपिला वात्स्यायन के व्यक्तिगत वस्त्र संग्रह का एक दुर्लभ और सूक्ष्म दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। यह दर्शाती है कि जीवन भर संचित वस्त्र किस प्रकार स्मृति, पहचान और सांस्कृतिक निरंतरता को अभिव्यक्त करते हैं। प्रदर्शनी का उद्घाटन अपराह्न 3:30 बजे आईजीएनसीए की चित्रदीर्घा दर्शनम प्रथम और द्वितीय में होगा। यह प्रदर्शनी 29 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी, 2026 तक सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक जनता के लिए खुली रहेगी। कलानिधि विभाग आईजीएनसीए के संरक्षण विभाग के सहयोग से इस प्रदर्शनी का आयोजन कर रहा है।

प्रदर्शनी के महत्व पर टिप्पणी करते हुए, डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, “अभिव्यक्ति मात्र वस्त्रों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि शोध, संवेदनशीलता और दूरदृष्टि को एक साथ पिरोते हुए एक सूक्ष्म और सुसंगत क्यूरेटोरियल प्रस्तुति है। इसकी समग्रता डॉ. कपिला वात्स्यायन के इस आजीवन विश्वास को दर्शाती है कि कलाओं को उनके संपूर्ण सांस्कृतिक, सौंदर्यपरक और दार्शनिक संदर्भ में समझा जाना चाहिए।” ये शब्द इस बात पर बल देते हैं कि यह संग्रह आज भी क्यों महत्वपूर्ण है और भारत की कलात्मक विरासत के बहुआयामी वृत्तांत को संरक्षित करने और संप्रेषित करने में इसकी भूमिका को उजागर करते हैं।

प्रोफेसर (डॉ.) रमेश चंद्र गौर कहते है, “वस्त्र मानव सभ्यता का अभिन्न अंग रहे हैं, जो सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक कथाओं को प्रतिबिम्बित करते हैं। भारत की विविध वस्त्र परम्पराएं इसकी सभ्यतागत भावना का जीवंत संग्रह हैं। अभिव्यक्ति डॉ. कपिला वात्स्यायन की दृष्टि का सम्मान करते हुए इस समृद्धि को उजागर करती है, जहां भौतिक संस्कृति भारत की बहुलवादी विरासत को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में कार्य करती है।”
संरक्षण के पहलू पर प्रकाश डालते हुए, आईजीएनसीए के संरक्षण विभाग के प्रमुख प्रो. अचल पंड्या ने कहा, “वस्त्र विरासत का संरक्षण तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब संग्रह डॉ. कपिला वात्स्यायन जैसी प्रख्यात बुद्धिजीवी का हो।”

प्रदर्शनी में भारत भर की 50 से अधिक विशिष्ट शिल्प परम्पराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले 50 से अधिक वस्त्र प्रदर्शित किए जाएंगे। प्रदर्शनी की क्यूरेटर वस्त्र अभिलेखपाल (टेक्स्टाइल आर्काइविस्ट) और शोधकर्ता सुश्री सरीका अग्रवाल हैं।

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