नक्सलियों के बड़े कमांडर ने साथियों सहित हथियार डाले, बस्तर में बड़ी संख्या में नक्सली ढेर

देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में शनिवार को नक्सली संगठन को सुरक्षा बलों से दो बड़े झटके लगे हैं। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक वरिष्ठ माओवादी कमांडर समेत लगभग 20 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जबकि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ चल रही कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक नक्सली मारे गए। यह घटनाक्रम नक्सलवादी समूहों के कमजोर पड़ते संगठनात्मक ढांचे का संकेत माना जा रहा है।

हथियार डालने के बाद नक्सली
Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: January 4, 2026 12:03 am

तेलंगाना पुलिस के सामने शनिवार को एक वरिष्ठ नक्सली कमांडर बरसे देवा (जिसे बड़से सुक्का नाम से भी जाना जाता है) ने 15–20 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। देवा नक्सली संगठन के पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के “बटालियन नंबर 1” का प्रमुख कमांडर था और उसे नक्सल आंदोलन की सबसे खतरनाक इकाइयों में से एक के रूप में देखा जाता था। देवा पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था और वह छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के निवास से संबंध रखता था। आत्मसमर्पण के दौरान बड़ी संख्या में असलहे और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपे गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह बड़ी सफलता है और इससे नक्सली संगठन के नेतृत्व और क्षमताओं को गंभीर क्षति पहुँची है।

सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई के दौरान, छत्तीसगढ़ के बस्तर और उसके आसपास के जंगलों में रविवार को दो अलग-अलग मुठभेड़ों में लगभग 14 नक्सलियों को मार गिराया गया। इन मुठभेड़ों में District Reserve Guard (DRG) और अन्य अर्धसैनिक इकाइयों ने भारी तोपख़ाना और रणनीतिक हलचल का प्रयोग करते हुए नक्सलियों के गढ़ में घुसकर कार्रवाई की। सुरक्षा बलों ने बताया कि मुठभेड़ों के दौरान नक्सलियों ने गोलीबारी की, जिसके जवाब में जवाबी कार्रवाई की गई, और कई हथियार बरामद किए गए। यह अभियान उस क्षेत्र में जारी व्यापक नक्सल विरोधी अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य घोंसले तोड़ना और हिंसा को रोकना है।

इन घटनाओं के बाद अधिकारियों ने कहा है कि नक्सलियों की संघर्ष की क्षमता में कमी आई है और संगठनात्मक ढांचा ढहने लगा है। वरिष्ठ कमांडरों के आत्मसमर्पण और बड़े पैमाने पर नक्सलियों के ढेर हो जाने से सुरक्षा बलों को रणनीतिक सफलता मिली है और इसे नक्सल विरोधी अभियानों में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे स्थानीय लोगों को सुरक्षा तथा विकास का लाभ मिलने में सहायता मिलेगी।

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