भारतीय संस्कृति और इतिहास में नन्दी की महत्ता पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के संरक्षण और अभिलेखागार प्रभाग ने ‘सेव आवर कंट्री फाउंडेशन’, चेन्नई के सहयोग से 28 और 29 नवंबर, 2024 को “एक्सप्लोरिंग द एसेंसः नन्दी इन माइथोलॉजी एंड हिस्ट्री” (सत्व का अन्वेषण: भारतीय पौराणिक कथाओं और इतिहास में नन्दी) विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

Written By : डेस्क | Updated on: November 30, 2024 11:14 pm

संगोष्ठी में भारतीय प्रागैतिहासिक काल, आद्य इतिहास, मूर्तिकला, प्रतिमा विज्ञान, मंदिर वास्तुकला, दर्शन, साहित्य, आगम और पौराणिक ग्रंथों आदि में नन्दी और वृषभ पर विद्वत्तापूर्ण शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। प्रख्यात विद्वानों, वरिष्ठ प्रोफेसरों, शोधार्थियों और पीएचडी छात्रों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस सेमिनार में ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से कई युवा शोधकर्ता शामिल हुए।

आईजीएनसीए के संरक्षण विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अचल पंड्या ने ‘सेव आवर कंट्री फाउंडेशन’, चेन्नई की निदेशक सुश्री पद्मप्रिया एस. के साथ सेमिनार सत्र का उद्घाटन किया। आईजीएनसीए के क्षेत्रीय केन्द्र रांची के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कुमार संजय झा, आईजीएनसीए क्षेत्रीय केन्द्र, त्रिशूर की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मानसी रघु नंदन भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुल सात सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 35 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन शोधपत्रों के माध्यम से नन्दी के विभिन्न पहलुओं और विषयों के बारे में नई और कम ज्ञात जानकारियां सामने आईं।

विभिन्न सत्रों में शैव आगम में नन्दी, भारतीय शैल कला में वृषभ, भारतीय प्रागैतिहासिक और ताम्रपाषाण काल में वृषभ, वृषभ और नन्दी का अर्थ, वृषभ के विभिन्न रूप, नन्दी और इसके बहुआयामी रूप और अर्थ पर विस्तार से चर्चा की गई। आईजीएनसीए के कला कोश प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. सुधीर लाल, कला दर्शन प्रभाग की अध्यक्ष प्रो. ऋचा कम्बोज, जनपद सम्पदा प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. के. अनिल कुमार, नागपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रभाष साहु, प्लीच इंडिया फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. ई. शिवांगीरेड्डी, महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के डॉ. जयराम पोडुवाल और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डॉ. मीनाक्षी जोशी ने विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता की तथा प्रस्तुत अवधारणाओं और शोधपत्रों पर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। इस सेमिनार का समन्वयन एवं संयोजन आईजीएनसीए, नई दिल्ली के परियोजना सहायक श्री सदीश शर्मा ने किया। सेमिनार के सभी सत्र कुछ ही दिनों में आईजीएनसीए के यूट्यूब चैनल पर आम जनता के लिए उपलब्ध होंगे।

संगोष्ठी से पूर्व, 27 नवंबर को शाम 4 बजे  एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पुस्तक ‘म्यूजियम्स एंड आर्काइव्स: ए पब्लिक स्पेस फॉर एजुकेशन एंड रिसर्च’ का विमोचन आईजीएनसीए, नई दिल्ली के समवेत सभागार में हुआ। पुस्तक लोकार्पण समारोह के बाद, आईजीएनसीए के क्षेत्रीय केंद्र वडोदरा की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री अरूपा लाहिड़ी ने ‘नृत्य का धर्म और आनंद: नंदी नृत्य’ थीम पर अनूठे भरतनाट्यम नृत्य का प्रदर्शन किया।

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2 thoughts on “भारतीय संस्कृति और इतिहास में नन्दी की महत्ता पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

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