टोक्यो में खेले गए फाइनल में विश्व बैडमिंटन की सबसे मजबूत खिलाड़ियों में गिनी जाने वाली यामागुची को उनके घरेलू दर्शकों के सामने हराना पीवी सिंधु के करियर की सबसे यादगार जीतों में शामिल माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सिंधु ने लगभग चार वर्षों बाद यामागुची पर जीत दर्ज की और अपने लंबे खिताबी सूखे का भी अंत किया।
31 वर्षीय सिंधु ने पूरे मुकाबले में आक्रामक और संयमित खेल का प्रदर्शन किया। पहले गेम में शुरुआती बढ़त गंवाने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लगातार अंक जुटाए। दूसरे गेम में भी यामागुची ने चुनौती पेश की, लेकिन सिंधु ने निर्णायक क्षणों में अपने अनुभव का पूरा लाभ उठाते हुए मैच सीधे गेमों में समाप्त कर दिया।
यह सिंधु के करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ सुपर-750 खिताब भी है। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन सिंधु पिछले कुछ वर्षों से चोट और अस्थिर प्रदर्शन के कारण बड़ी सफलता से दूर थीं। ऐसे में इस जीत को उनके करियर की दमदार वापसी के रूप में देखा जा रहा है।
फाइनल तक का सफर भी सिंधु के लिए आसान नहीं रहा। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में कई शीर्ष खिलाड़ियों को मात दी और लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए खिताबी मुकाबले तक पहुंचीं। फाइनल में तीन बार की विश्व चैंपियन यामागुची को हराकर उन्होंने अपने अभियान को ऐतिहासिक जीत के साथ समाप्त किया।
जीत के बाद सिंधु ने सोशल मीडिया पर तिरंगे के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “मैं इसी के लिए खेलती हूं—अपने देश और अपने तिरंगे के लिए।” उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देशभर के नेताओं, खेल हस्तियों और खेल प्रेमियों ने बधाई दी। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत अगले महीने नई दिल्ली में होने वाली विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप से पहले भारतीय स्टार के लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित होगा।
ये भी पढ़ें :-भारत के निजी अंतरिक्ष युग की ऐतिहासिक उड़ान, ऐसे बन गया दुनिया का तीसरा देश