तेल कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति संकट की आशंका के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का यह फैसला लिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में ईंधन और महंगा हो सकता है।
डीजल की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर सब्जियों, फल, राशन, दूध और रोजमर्रा के सामानों पर पड़ सकता है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने के बाद किराया और मालभाड़ा बढ़ना तय है।
नोट: 15 मई को पहली बढ़ोतरी और 19 मई को दूसरी बढ़ोतरी लागू हुई।
बाजार और आम लोगों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों से खुदरा महंगाई दर पर दबाव बढ़ेगा। ट्रांसपोर्ट सेक्टर, टैक्सी सेवाएं, ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियां और कृषि क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। कई राज्यों में निजी बस ऑपरेटरों ने किराया बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं।
इस बीच सोशल मीडिया पर कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ने और ईंधन संकट की अफवाहें भी फैलने लगी हैं। आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है तो तेल कंपनियां आने वाले दिनों में और मूल्य वृद्धि कर सकती हैं।
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