साहित्य सम्मेलन में लघुकथा-संग्रह ‘बेनाम चिट्ठियाँ का हुआ लोकार्पण, हुई लघुकथा-गोष्ठी

वरिष्ठ लेखिका डा ऋचा वर्मा की लघुकथाएँ मर्म को स्पर्श करती हैं। उनकी लघुकथाओं में समाज की पीड़ा, द्वंद्व और जीवन की कटु सच्चाइयाँ भी हैं तो उनके प्रतिकार और समाधान के स्वर भी हैं। उनके भोले और सरल मन की भाँति ही इनकी कथाएँ भी सरलता से पाठकों से संवाद करती हैं।

पुस्तक का विमोचन करते बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ एवं अन्य
Written By : डेस्क | Updated on: July 26, 2025 8:14 pm

यह बातें, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में शनिवार को डा वर्मा के लघुकथा-संग्रह ‘बेनाम चिट्ठियाँ’ के लोकार्पण-समारोह की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि संग्रह में कुल 93 लघुकथाएँ संकलित हैं। इनमें से अधिकांश को ‘लघुकथा-विधा’ की शास्त्रीयता की दृष्टि से संपन्न कहा जा सकता है। लघुकथा-सृजन में, जिसे कम शब्दों में गहरा प्रभाव डालने वाली अत्यंत लोकप्रिय हो रही साहित्य की विधा मानी जा रही है, ऋचा जी एक दृढ़ और सार्थक हस्तक्षेप कर रही हैं, जो प्रशंसा का विषय है।

समारोह का उद्घाटन करते हुए, बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक और राज्य कर्मचारी चायं आयोग के अध्यक्ष आलोक राज ने कहा कि लोकार्पित पुस्तक की लेखिका जो विशिष्ट सम्मानों से अलंकृत हैं, अभिव्यक्ति के सामर्थ्य से संपन्न हैं। इनकी सामाजिक -सरोकारों की दृष्टि इनकी लघुकथाओं में दिखाई देती है। जीवन और लेखन, दोनों ही क्षेत्रों में ये सफल रही हैं।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के साहित्यमंत्री भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि इन दिनों लघुकथा लिखने वालों की भींड़ लगी हुई है। किंतु ऋचा जी इस भींड़ में भी अपना अलग पहचान बनाने में सफल हुई हैं। इनमें दृष्टि-संपन्नता है और संवेदनशीलता भी। इनकी कथाओं में स्त्री-विमर्श भी अपनी विशिष्टता में है। इनकी शैली संवाद की है, जो विशेष प्रभाव छोड़ती हैं।

सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष जियालाल आर्य, डा मधु वर्मा, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार डा ध्रुव कुमार, कथाकार सिद्धेश्वर, डा भावना शेखर, डा निगम प्रकाश नारायण, डा अनिता राकेश, डा निकुंज प्रकाश नारायण, ईशिता नारायण, अभिजीत राज तथा चंदा मिश्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा लेखिका को बधाई दी।

इस अवसर पर आयोजित लघुकथा-गोष्ठी में रामयतन यादव, विभा रानी श्रीवास्तव, कुमार अनुपम, मधुरेश नारायण, डा जंग बहादुर पाण्डेय, डा पुष्पा जमुआर, डा मीना कुमारी परिहार, इंदु उपाध्याय, डा पूनम देवा, डा सीमा रानी, गार्गी राय, डा पूनम सिन्हा श्रेयसी, डा ओम् प्रकाश पाण्डेय, अरविंद कुमार वर्मा, पूनम कतरियार, पूनमश्री, ईं अशोक कुमार, रंजना सिंह, अपराजिता रंजना, आलोक चोपड़ा और इंदु भूषण सहाय ने अपनी लघुकथा का पाठ किया। मंच का संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन डा मनोज गोवर्द्धनपुरी ने किया।

सुप्रसिद्ध स्त्रीरोग-विशेषज्ञा डा संगीता नारायण, आचार्य विजय गुंजन, शुभचंद्र सिन्हा, कमल नयन श्रीवास्तव, डा सुमेधा पाठक, डा समरेंद्र नारायण, डा किरण नारायण, कमल किशोर वर्मा, मीरा प्रकाश, प्रेमलता सिंह, डा प्रतिभा रानी, रेखा भारती मिश्र, सुनील सिन्हा, श्वेता ग़ज़ल, अनिल रश्मि, सुनिता रंजन, गोविंद प्रसाद जायसवाल, तनुजा सिन्हा, मीना सिन्हा, विद्या रानी, विनीता नारायण, प्रणय कुमार सिन्हा आदि बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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