मनका-निर्माण कला पर दो दिवसीय व्याख्यान और कार्यशाला का आयोजन

राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) ने अपने प्रमुख कार्यक्रम "मेरा गाँव मेरी धरोहर" (एमजीएमडी) के अंतर्गत, एनएमसीएम ने आईजीएनसीए में "खंभात, गुजरात की मनका कला" पर दो दिवसीय गहन कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला की अध्यक्षता और उद्घाटन आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने किया। इस अवसर पर प्रतिष्ठित विशेषज्ञ उपस्थित थे - आईआईटी गांधीनगर के पुरातत्वविद् और फैकल्टी प्रो. आलोक कुमार कानूनगो, महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय बड़ौदा के पुरातत्वविद् और फैकल्टी प्रो. अजित प्रसाद और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कुशल शिल्पकार अनवर हुसैन शेख तथा उनकी टीम। इस कार्यक्रम में एनएमसीएम के अधिकारियों के साथ-साथ आईजीएनसीए के संकाय सदस्य और शोध छात्र भी उपस्थित थे।

प्रो. अजित प्रसाद, डॉ. आलोक कुमार कानूनगो, डॉ. सच्चिदानंद जोशी और डॉ. मयंक शेखर
Written By : डेस्क | Updated on: November 13, 2025 11:26 pm

मनका-निर्माण कला पर कार्यशाला के उद्घाटन भाषण देते हुए, डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने एनएमसीएम की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला, जिसमें 2023 में लॉन्च किया गया एमजीएमडी पोर्टल (https://mgmd.gov.in/) भी शामिल है। एमजीएमडी के तहत, 6 लाख से अधिक गांवों का सांस्कृतिक मानचित्रण (कल्चरल मैपिंग) किया गया है, और डेटा को एक इंटरैक्टिव पोर्टल ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इसे 2023 में लॉन्च किया गया था। एमजीएमडी पोर्टल गांवों के सांस्कृतिक तत्वों की एक विस्तृत शृंखला को दर्शाता है, जिसमें मौखिक परंपराएं, विश्वास, रीति-रिवाज, ऐतिहासिक महत्व, कला के रूप, पारंपरिक भोजन, प्रमुख कलाकार, मेले और त्योहार, पारंपरिक पोशाक, आभूषण और स्थानीय स्थल शामिल हैं।

एनएमसीएम के मिशन निदेशक डॉ. मयंक शेखर ने स्वागत भाषण दिया। डॉ. आलोक कुमार कानूनगो ने अपने व्याख्यान “इंडियन स्टोन बीड्स : इंटरलेसिंग क्राफ्ट, कल्चर एंड टेक्नोलॉजी (भारतीय पाषाण मनके : शिल्प, संस्कृति और प्रौद्योगिकी का अंतर्संबंध)” के माध्यम से खंभात की स्टोन बीड निर्माण परंपरा के इतिहास को हड़प्पा काल तक पहुँचाया और प्रारंभिक कारीगरों के तकनीकी परिष्कार और वैज्ञानिक समझ को रेखांकित किया। उन्होंने प्राचीन ड्रिलिंग और पॉलिशिंग तकनीकों पर अंतर्दृष्टि प्रस्तुत की और दर्शाया कि कैसे ये प्रथाएँ शिल्प उत्पादन के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक संरचनाओं के विकास को प्रकट करती हैं। उन्होंने कहा कि बीड निर्माण केवल कला नहीं, विज्ञान भी है।

सत्र का समापन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पकार श्री अनवर हुसैन शेख और उनकी टीम द्वारा एक जीवंत प्रदर्शन के साथ हुआ। इसमें उन्होंने सदियों पुराने यांत्रिक औज़ारों का उपयोग करके पारंपरिक मनका-निर्माण की जटिल प्रक्रिया का प्रदर्शन किया, जो कौशल और सुक्ष्मता की उल्लेखनीय निरंतरता को दर्शाता है। हड़प्पाकालीन मनका-निर्माण तकनीक का अध्ययन और दस्तावेज़ीकरण राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की जीवंत शिल्प परंपराओं की एक लंबी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि प्रदान करता है।

यह कार्यशाला एनएमसीएम द्वारा पुरातात्विक अनुसंधान को हमारे देश की जीवंत शिल्प परंपराओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका 5000 वर्षों का डॉक्यूमेंटेड इतिहास है। भारत की प्राचीन भौतिक संस्कृति को उसके समकालीन शिल्पकारों से जोड़कर, मिशन भारत की अमूर्त और मूर्त विरासत की चिरस्थायी विरासत का दस्तावेजीकरण, संरक्षण और संवर्धन करने के अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है।

कार्यक्रम का संचालन ऐश्वर्या मेहता ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन एनएमसीएम की डॉ. स्निग्धा ने किया।
ग़ौरतलब है कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन हेतु, संस्कृति मंत्रालय ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) की स्थापना की है, जिसका कार्यान्वयन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) द्वारा किया जाता है। इस मिशन का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत और उसकी ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को पुनर्जीवित करने की क्षमता का दस्तावेजीकरण करना है।

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