यह बातें, सोमवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आहूत हिन्दी पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला’ के चौथे दिन आयोजित डा बेचन जयंती की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि डा विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ बहु-आयामी सारस्वत गुणों से युक्त एक आकर्षक व्यक्तित्व के साधु-पुरुष थे। साहित्य सम्मेलन से उनका गहरा लगाव था। अनेक वर्षों तक वे भागलपुर ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष और १९९६ से २००१ तक बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के भी अध्यक्ष रहे।
डा ब्रज किशोर पाठक को मिला स्मृति-सम्मान
समारोह का उद्घाटन करते हुए, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि बेचन जी ने हिन्दी साहित्य में अपने अवदान से बिहार का गौरव बढ़ाया। उनके रचनात्मक-साहित्य और आलोचनात्मक साहित्य हिन्दी को समृद्ध करते हैं। पूर्व राज्यपाल ने, वरिष्ठ साहित्यकार डा ब्रज किशोर प्रसाद को इस वर्ष का ‘डा विष्णु किशोर झा ‘बेचन’ स्मृति-सम्मान से विभूषित किया। सम्मान-स्वरूप डा पाठक को वंदन-वस्त्र,प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिन्ह के साथ ग्यारह हज़ार रूपए की सम्मान-राशि प्रदान की गयी। इस अवसर पर डा पाठक द्वारा संपादित पुस्तक ‘डा बेचन समग्र (खंड-३)’ का लोकार्पण भी किया गया।
पुस्तक ‘बेचन समग्र (खंड-३)’ का हुआ लोकार्पण
समारोह के मुख्य अतिथि और बिहार लोक सेवा आयोग के सदस्य डा अरुण भगत ने कहा कि डा बेचन पर गम्भीरतापूर्वक शोध के कार्य होने चाहिए। उनके कथा-साहित्य विशेष उल्लेखनीय है। डा बेचन के साहित्य में भारत है, भारतीयता है और भारत-बोध है। वे सांस्कृतिक-चेतना के साहित्यकार थे। उन्होंने साहित्य की प्रायः सभी विधाओं में लेखन किया। उनके सुपुत्र डा मनोज कुमार झा के सदप्रयास से डा बेचन के समग्र साहित्य का प्रकाशन हो रहा है। आज उनका तीसरा खंड लोकार्पित हुआ है, जो स्वागत योग्य है।
मगध विश्व विद्यालय में मानविकी के संकायाध्यक्ष प्रो शैलेंद्र कुमार चौधरी, मिथिला विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो रत्नेश्वर मिश्र, डा बेचन के पुत्र और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के परीक्षा-नियंत्रक डा मनोज कुमार झा, सम्मेलन की उपाध्यक्ष डा मधु वर्मा, डा कुमार अरुणोदय, बेचन जी की पुत्री डा मीना ठाकुर तथा सम्मानित साहित्यकार डा ब्रज किशोर पाठक ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कवियों ने दी काव्यांजलि
इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन का आरंभ चंदा मिश्र ने वाणी-वंदना से किया। वरिष्ठ कवयित्री आराधना प्रसाद, डा रत्नेश्वर सिंह, बच्चा ठाकुर, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, प्रो समरेंद्र नारायण आर्य, डा पुष्पा जमुआर, ईं अशोक कुमार, मोईन गिरिडिहवी, अमृता राय, प्रो अमलेन्दु सिन्हा, सदानन्द प्रसाद, रमा शंकर मिश्र, हृदय कुमार सिन्हा, उत्पल कुमार, इंदु भूषण सहाय, विभारानी श्रीवास्तव तथा डा मनोज गोवर्द्धनपुरी, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, असश्विनी कविराज, अरुण कुमार श्रीवास्तव आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के सुमधुर पाठ से समारोह को सरसता प्रदान की। अतिथियों का स्वागत सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद ने, धन्यवाद-ज्ञापन कार्यक्रम के संयोजक प्रवीर कुमार पंकज ने तथा मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने किया।
इस अवसर पर, डा रामराज शर्मा, ब्रज भूषण शर्मा, प्रो के ठाकुर, प्रकाशक राजेश शुक्ल, ईं बाँके बिहारी साव, ईं आनन्द किशोर मिश्र, सुशील कुमार झा, मृणाल कांत पाठक, हेमन्त मिश्र, रानी पाठक समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
ये भी पढ़ें :-व्यक्ति को प्रभावशाली बनाता है व्याख्यान-कौशल : अप्सरा
**backbiome**
backbiome is a naturally crafted, research-backed daily supplement formulated to gently relieve back tension and soothe sciatic discomfort.
**back biome**
Mitolyn is a carefully developed, plant-based formula created to help support metabolic efficiency and encourage healthy, lasting weight management.