राधाकृष्ण की कहानियाँ संग्रह में संजय कृष्ण ने शामिल की हैं उनकी 17 चुनिंदा रचनाएं

हिंदी की ऐतिहासिक पत्रिका "हँस"का संपादन कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद स्वयं करते थे .उन दिनों किसी कथाकार का "हँस " में छपना उसे शीर्षस्थ कथाकार की श्रेणी में खड़ा कर देता था. उसमें नियमित छपने वालों में एक कथाकार थे ' राधाकृष्ण '.ऐसा भी उपलब्ध दस्तावेजों से पता चलता है कि प्रेमचंद के निधन के बाद उनकी पत्नी शिवदानी देवी ने पत्र लिखकर रांची से बनारस बुलवाया और "हँस " के संपादन का दायित्व दिया . कुछ अंकों का संपादन इन्होंने किया भी फिर वापस रांची लौट आये .

पुस्तक के आवरण पृष्ठ का अंश
Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: May 28, 2026 12:11 am

राधाकृष्ण अद्भुत प्रतिभा के कथाकार थे. उनके प्रकाशित पुस्तकों की सूची लंबी है. उनकी प्रकाशित कृतियों में पांच कहानी संग्रह,पांच उपन्यास, एक व्यंग्य संग्रह, दो नाटक, एक एकांकी और इक्कीस बालोपयोगी पुस्तकें हैं. इसके अतिरिक्त इन्होंने एकादशी साहित्य मधुकरी और साहित्य श्री का संपादन भी किया. राधाकृष्ण जी ‘ घोष – बोस – बनर्जी -चटर्जी ” के नाम से भी हास्य व्यंग्य की रचनाएं लम्बे समय तक लिखते रहे.

राधाकृष्ण जी चर्चित पत्रिका ‘आदिवासी ‘ का लगभग तेईस वर्षों तक संपादन किया था. राधाकृष्ण जी ने कुछ वर्षों तक आकाशवाणी में भी प्रोड्यूसर के पद पर कार्य किया था. ख्यातिप्राप्त फिल्म निर्देशक ऋत्विक घटक के तत्कालीन दक्षिण बिहार के आदिवासी क्षेत्रों में फिल्म निर्माण के समय राधाकृष्ण जी ने उनकी फिल्मों के लिए पटकथा भी लिखी. फिर कुछ दिनों तक फिल्मों में कहानियां और संवाद लिखने बम्बई भी गये पर राधाकृष्ण जी का मूल कार्यक्षेत्र रांची ही रहा. पिछले लगभग नब्बे सालों से पता नहीं कितने कथा प्रेमियों ने राधाकृष्ण जी की कहानियाँ बार- बार पढ़ी हैं.

हाल में हिंदी के चर्चित पत्रकार, लेखक , शोधकर्ता संजय कृष्ण ने राधाकृष्ण जी की लोकप्रिय कहानियों का चयन कर प्रकाशित कराया है. प्रथम अध्याय “राधाकृष्ण” में संजय लिखते हैं कि ‘….. रांची के अपर बाजार में 18 सितंबर 1910 को जन्मे 3 फरवरी 1979 को दिवंगत राधाकृष्ण का जीवन संकटों से घिरा रहा।…राधाकृष्ण की स्कूली शिक्षा सामान्य ही रही. जिला स्कूल से पढ़ाई की, लेकिन पढ़ाई पूरी कर सके यह कहना मुश्किल है।…..’ 190पृष्ठ के इस संग्रह में राधाकृष्ण की चुनी हुई सत्रह कहानियाँ हैं.

संकलित कहानियों के नाम हैं 1.बालेंदु का स्कूल 2.मुक्ति 3.और ज़िंदगी चलती रही 4.कानूनी और गैरकानूनी 5. दुकू 6.मुड़कर भी न देखा 7.मूल्य  8.टिली 9.कोयले की जिंदगी 10.आदमी की समझ 11.पागल 12.छल 13.लंबी लड़ाई 14. माँ जेबीटी 15.गरम प्याला  16.ज्ञान की प्राप्ति 17.वे दोनों. इन कहानियों को पढ़कर पता चलता है कि हिंदी कहानी की यात्रा कब और कैसे शुरू हुई किन रास्तों से गुजरी और इसमें कैसे परिवर्तन होते गए.

यह भी देखने को मिलता है कि स्थानीय जीवन के सभी गंभीर विषयों की ओर लेखक की कैसी पैनी दृष्टि होती थी. बहुत ऐसे भी वर्णन इन कहानियों में मिलेंगे जो प्रायः और कहीं उपलब्ध ही नहीं . प्रायः इसी तीखी नज़र और रोचक शैली ने प्रेमचंद को भी प्रभावित किया हो.! संग्रह बहुमूल्य कथाओं का संकलन है, अति पठनीय और संग्रहणीय है. छपाई और मुखपृष्ठ आकर्षक है.विस्तृत रोचक भूमिका में संजय कृष्ण जी ने इस कथा लेखक के प्रति आकर्षण और भी बढ़ा दिया है .

पुस्तक: राधाकृष्ण की कहानियाँ, प्रस्तुति: संजय कृष्ण , पृष्ठ:190, प्रकाशन वर्ष: 2025, प्रकाशक: सत्साहित्य प्रकाशन, मूल्य: रु.400

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)

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