SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, यूपी चुनाव से पहले विपक्ष को बड़ा झटका

 मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Review (SIR) को लेकर चले लंबे राजनीतिक और कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया को वैध ठहरा दिया। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि चुनाव आयोग ने अपने संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों के दायरे में रहकर काम किया है और SIR प्रक्रिया “कानूनी रूप से टिकाऊ” है।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: May 27, 2026 1:10 pm

SIR पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को विपक्षी दलों के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। खासकर राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव  लगातार SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे थे। विपक्ष का आरोप था कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं।

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आए इस फैसले ने विपक्ष की उस रणनीति को कमजोर कर दिया है जिसमें मतदाता सूची पुनरीक्षण को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा था। बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में SIR को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर था।

दो जजों की पीठ ने सुनाया फैसला

यह फैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाला बागची की दो सदस्यीय पीठ ने सुनाया। अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसे बुधवार को सुनाया गया। पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है और मतदाता सूची की शुद्धता उसी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

निर्वाचन आयोग ने अधिकारों का अतिक्रमण नहीं किया

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल इसलिए SIR को अवैध नहीं कहा जा सकता कि यह सामान्य पुनरीक्षण प्रक्रिया से अलग है। अदालत ने माना कि परिस्थितियों के अनुसार चुनाव आयोग को पुनरीक्षण की प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग “अपने वैधानिक अधिकारों के बाहर जाकर काम करता नहीं दिखता।” अदालत की इस टिप्पणी को चुनाव आयोग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

विपक्ष ने उठाए थे सवाल

याचिकाकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना था कि SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने में मनमानी हो सकती है। पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों में इस प्रक्रिया को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। कुछ मामलों में अदालत ने अपील तंत्र को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश भी दिए थे।

हालांकि अंतिम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की संवैधानिक शक्तियों को बरकरार रखा और कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा है।

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2 thoughts on “SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, यूपी चुनाव से पहले विपक्ष को बड़ा झटका

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