कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर आईजीएनसीए की निदेशक (प्रशासन) डॉ. प्रियंका मिश्रा, कला दर्शन की विभागाध्यक्ष प्रो. ऋचा कम्बोज, दिल्ली नगर निगम के सेंट्रल जोन की अध्यक्ष योगिता सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। प्रदर्शनी का संयोजन प्रो. ऋचा कंबोज ने किया है। इस अवसर पर अतिथियों ने ‘मन की बात’ पर प्रदर्शनी के कैटलॉग का लोकार्पण भी किया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए रामबहादुर राय ने कहा कि किन्हीं कारणों से दिल्ली की मुख्यमंत्री नहीं आ सकीं। हो सकता है, आने वाले दिनों में वे इस प्रदर्शनी को देखने आएं। उन्होंने कहा, “ये अवसर हमारे लिए हर दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल 75 के हो जाएंगे और उनकी जो सक्रियता है, उनके अंदर शक्ति का जो उत्स है, उसे देखकर कोई भी चकित होगा कि वे 75 के हैं या 27 के हैं। उनके ‘मन की बात’ उन्होंने शुरू की और मेरा ख्याल है कि इसका 125वां एपिसोड होने वाला है। ‘मन की बात’ पर कई किताबें आ चुकी हैं, लेकिन ये जो कला प्रदर्शनी है, ‘मन की बात’ को चित्रों के ज़रिये समझाने का प्रयास करती है।”
उन्होंने आगे कहा, “प्रत्येक चित्र को समझाने के लिए उसके साथ उसका एक छोटा-सा विवरण लिखा जाना चाहिए और इन चित्रों में लिखा भी गया है। इससे लोग ‘मन की बात’ को दोबारा पढ़ेंगे। मैं मानता हूं कि एक छोटी-सी किताब या बड़ी किताब को आप दोबारा पढ़ते हैं, तिबारा पढ़ते हैं, तो हर बार उसमें से नया अर्थ प्रकट होता है। मंजीत सिंह जी के चित्रों में भी यही बात होगी। आप उसको एक बार देखेंगे, दो बार देखेंगे, तो हर बार उसमें से नया अर्थ ग्रहण करेंगे और वो मोदी जी के व्यक्तित्व का अनूठा पहलू होगा। इसीलिए मोदी जी के 75वें जन्मदिन से पहले इस प्रदर्शनी का आयोजन हुआ है। इसके लिए मैं प्रो. ऋचा कम्बोज जी को बधाई देता हूं।”
चित्रकार मंजीत सिंह ने कहा, “मन की बात कार्यक्रम समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति, तीनों को जोड़ने वाला संवाद है। यह केवल जनमानस को नहीं, बल्कि शीर्ष नेतृत्व को भी जोड़ता है। यही इसकी विशेषता है और मुझे विश्वास है कि आधुनिक भारत का यह एक शाश्वत दस्तावेज़ बनकर आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत को समझने में अत्यंत मूल्यवान सिद्ध होगा। मेरी चित्र प्रदर्शनी भी इसी संदर्भ में समय के साथ शाश्वत रहेगी।”
इस अवसर पर डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, ‘मन की बात’ कार्यक्रम ने आम जन के जीवन, संस्कृति और प्रेरक कथाओं को राष्ट्रीय विमर्श में स्थान दिया है और मंजीत सिंह की यही कोशिश रही कि वे चित्रकला के माध्यम से इस कार्यक्रम की आत्मा को कैनवास पर उतारें। मन की बात को देश की विविधता और एकता का सशक्त माध्यम बताते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि यह प्रदर्शनी उस भावना को दृश्य कला के जरिये मूर्त रूप देती है।
यह प्रदर्शनी 17 से 22 सितम्बर तक आईजीएनसीए की दर्शनम् गैलरी में आम जनता के लिए प्रतिदिन प्रातः 10:30 से सायं 6:30 बजे तक खुली रहेगी।
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