बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ के अवकाश पर रहने के कारण, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डॉ. उपेंद्रनाथ पाण्डेय ने बैठक की अध्यक्षता की, जिनके नाम का प्रस्ताव संरक्षक-सदस्य कुमार अनुपम ने किया और डॉ. शंकर प्रसाद, अशोक कुमार, प्रवीर कुमार पंकज समेत समस्त उपस्थिति ने समर्थन किया।
स्थायी समिति ने एक और महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए, सम्मेलन की नियमावली के नियम -१९ को विलोपित करने का निर्णय लिया, जो नियम, सम्मेलन के किसी पदाधिकारी को लगातार दो पूर्ण कार्य-काल तक ही उस पद पर रहने की सीमा निर्धारित करता था। इस नियम के विलोपन से अब कोई पदाधिकारी अपने पद पर तीसरे कार्य-काल के लिए भी योग्य हो सकता है।
बैठक के आरम्भ में सभा के अध्यक्ष डा उपेन्द्र पाण्डेय ने बिहार के विभिन्न ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रतिनिधियों और स्थायी समिति के सदस्यों का स्वागत करते हुए, सम्मेलन के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराया और हिन्दी भाषा और साहित्य के उन्नयन में सम्मेलन के महान योगदान की चर्चा की। उन्होंने बताया कि सम्मेलन की स्थायी समिति ही संस्था की स्वामिनी समिति है, जिसको सम्मेलन के संचालन से संबंधित सभी प्रकार के निर्णय लेने का अधिकार है। इसलिए इस समिति का प्रत्येक सदस्य सम्मेलन के गौरव-वृद्धि के सम्मान का बराबर का अधिकारी है। उन्होंने आज की बैठक में आए सभी प्रस्तावों पर सर्व-सम्मति बनाने के लिए भी सदस्यों के प्रति आभार प्रकट किया।
विभिन्न प्रस्तावों पर सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, डा मधु वर्मा, सारण ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा बृजेंद्र कुमार सिन्हा, लक्खीसराय ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री देवेंद्र सिंह आज़ाद, भोजपुर ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो बलिराज ठाकुर, बक्सर ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष और वरिष्ठ कवि महेश्वर ओझा ‘महेश’, मुज़फ़्फ़रपुर ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री उदय नारायण सिंह, वैशाली ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष शशिभूषण कुमार, पूर्व विधान पार्षद और सम्मेलन के संरक्षक-सदस्य डा अजय कुमार सिंह, डा राम रेखा सिंह, डा रणजीत कुमार, डा ओम् प्रकाश जमुआर, डा आशीष कुमार सागर, अम्बरीष कान्त, कटिहार ज़िला के प्रतिनिधि डा जवाहर देव, कामेश्वर पाण्डेय, डा नागेश्वर प्रसाद यादव ने भी अपने विचार रखे। बैठक का संचालन सम्मेलन के पुस्तकालय मंत्री ईं अशोक कुमार ने किया।
बैठक में सम्मेलन की लोकभाषा मंत्री डा पुष्पा जमुआर, प्रचारमंत्री विभारानी श्रीवास्तव, कलामंत्री डा पल्लवी विश्वास, प्रबंधमंत्री कृष्ण रंजन सिंह, डा ध्रुब कुमार, प्रो नंदजी दूबे, बच्चा ठाकुर, कवयित्री आराधना प्रसाद, सागरिका राय, डा मीना कुमारी परिहार, प्रो उषा सिंह, डा ऋचा वर्मा, मीरा श्रीवास्तव, डा पूनम देवा, आरपी घायल, लता प्रासर, श्रीकांत व्यास, ईं बाँके बिहारी साव, जय प्रकाश पुजारी, डा आर प्रवेश, मधु रानी लाल, डा मनोज गोवर्द्धनपुरी, चित्तरंजन लाल भारती, राजेश भट्ट, चंदा मिश्रा, डा अमरनाथ प्रसाद, आचार्य आनन्द किशोर शास्त्री, डा अर्चना त्रिपाठी, डा प्रतिभा रानी, मीरा प्रकाश, नीता सहाय, अरुण कुमार श्रीवास्तव, डा रेणु मिश्रा, डा आशा रघुदेव, शंकर शरण मधुकर, अरविंद कुमार भारती, डा विनोद कुमार सिन्हा, प्रेम कुमार वर्मा, जीवन पासवान, अधिवक्ता जगदीश्वर प्रसाद सिंह, सुमन कुमार मल्लिक, विश्व मोहन चौधरी संत, निर्मला सिंह, डा इन्दु पाण्डेय, डा अनिमेष कुमार, अनीता मिश्रा सिद्धि, डा पंकज वासिनी, नीरव समदर्शी, अरुण कुमार निराला, कामेश्वर पंकज, कन्हैया प्रसाद केसरी, डा सिंधु कुमारी, प्रो सुखित वर्मा, पं गणेश झा, अरुण कुमार निराला, नम्रता कुमारी, सुरेश कुमार चौबे, हरेंद्र कुमार चतुर्वेदी, नेहाल कुमार सिंह ‘निर्मल’, मनोज कुमार झा, श्रीप्रकाश सिंह जितेंद्र कुमार आदि बड़ी संख्या में स्थायी-समिति के सदस्य उपस्थित थे।
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