मयंक जी अपनी लेखनी से भारत के लोगों को आह्वान करते हैं कि आप अपने अतीत के इतिहास, विरासत ,परंपरा और महत्व को जानिए और गौरवान्वित महसूस कीजिए.मयंक जी कोई प्रवचन ,कोई आख्यान देकर नहीं बता रहे .बहुत अध्ययन कर महत्वपूर्ण पुराने प्रसंगों को तलाश कर सरल भाषा में सामने रखते हैं ताकि पाठकों को खासकर युवाओं की जिज्ञासा बढ़े और आगे और पढ़ें और अपनी पुरानी संस्कृति से अवगत हों . आज की पुस्तक “जम्बूद्वीपे भरतखण्डे” 224 पृष्ठ की पुस्तक है.
इस पुस्तक में बारह अध्याय हैं. इन अध्यायों के शीर्षक को देखें तो अंदाज होगा कि कितने सुनियोजित ढंग से लेखक ने अपनी बात रखी है:1.देश काल की गति में लोक2. कलप कलप लगि प्रभु अवतरहीं 3. जीवन के प्राण हैं सूर्यदेव 4.महायुग की यात्रा का सहभागी मन्वंतर 5. महाव्योम की दर्शन चेतना में भूलोक 6.जम्बूद्वीपे भारतवर्षे देशांतर्गत 7. देवत्व की प्रतिष्ठा है यज्ञकर्म 8.मानव सभ्यता का पहला राष्ट्र है भारतवर्ष 9.अंतर्मन में चिरंतन ऋतु अनुराग 10.भरतखंड में चेतना का अखंड प्रवाह 11.आर्यावर्त -दक्षिणावर्त 12.उत्सव में शाश्वत की खोज .
इन सारे अध्यायों को देखकर यह तो अनुमान हो गया होगा कि कितनी गंभीरता से विषयों का चयन किया गया है. पुस्तक की कुछ पंक्तियां देखिए ” भारत एक सनातन राष्ट्र है, क्योंकि यह मानव सभ्यता का पहला राष्ट्र है.श्रीमद्भागवत के पंचम स्कंध के चतुर्थ अध्याय के श्लोक नौ में भारत राष्ट्र की स्थापना का वर्णन आता है”. पुस्तक की भाषा बहुत ही प्रांजल है . पुस्तक अति पठनीय और संग्रहणीय है.
पुस्तक: जम्बूद्वीपे भरतखण्डे लेखक :डॉ. मयंक मुरारी पृष्ठ :224, प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)
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