इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शुभकामना संदेश भी आईजीएनसीए के अध्यक्ष पद्मभूषण रामबहादुर राय ने पढ़कर सुनाया। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा, “इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र और माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा ‘ हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष’ विषय पर राष्ट्रीय महोत्सव के आयोजन के बारे में जानकर प्रसन्नता हुई। वर्ष 1826 में ‘उदन्त मार्त्तणड’ के प्रकाशन के साथ आरम्भ हुई हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी की यात्रा का यह अहम पड़ाव भारत की चेतना, विचार और जनजागरण का उत्सव है।”
इस अवसर पर मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, यह अतिश्योक्ति नहीं होगी, अगर हम कहें कि पत्रकारिता के इतिहास की गाथा भारत के इतिहास की भी गाथा है। आज का आयोजन भारत की वैचारिक चेतना का उत्सव है। उन्होंने कहा, पत्रकारिता कोई पेशा नहीं है, यह राष्ट्र चेतना का आंदोलन है। श्री सिंधिया ने पत्रकारिता में अपने पूर्वजों के योगदान का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा, ज़माना बदल जाए, तकनीक बदल जाए, मंच बदल जाए, लेकिन पत्रकारिता का धर्म नहीं बदलना चाहिए।
‘हिन्दी पत्रकारिता : 200 साल की महागाथा’ का विमोचन भी हुआ। ‘पद्म श्री’ विजयदत्त श्रीधर और डॉ. सच्चिदानंद जोशी द्वारा संपादित यह ग्रंथ हिन्दी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की व्यापक यात्रा का दस्तावेज है। इस पुस्तक में हिन्दी पत्रकारिता 30 दिग्गजों के लेख शामिल है, जो हिन्दी पत्रकारिता के विविध पक्षों के उद्भव, विकास और वर्तमान स्थिति के बारे में बताते हैं। इसके साथ ही, कार्यक्रम के दौरान डॉ. श्रीकांत सिंह की पुस्तक ‘हिन्दी पत्रकारिता के हिन्दीतर उन्नायक’ का भी लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक में गैर-हिन्दीभाषी क्षेत्रों के पत्रकारों के हिन्दी पत्रकारिता में योगदान के बारे में बताया गया है।
कार्यक्रम का एक अन्य प्रमुख आकर्षण हिन्दी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यात्रा को चित्रित करने वाली विशेष प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी में हिन्दी के अग्रणी समाचारपत्रों, पत्रिकाओं तथा युगनिर्माता संपादकों के दुर्लभ चित्र और ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए। आगंतुकों ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ से लेकर समकालीन पत्रकारिता तक की विकास-यात्रा को एक ही स्थल पर देखने का अवसर प्राप्त किया। प्रदर्शनी ने पत्रकारिता के इतिहास में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पत्रकारों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में रामबहादुर राय ने कहा, लोकतंत्र है, तो पत्रकारिता है। अकेले पत्रकारिता नहीं हो सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि जो भी ऊटपटांग बातें सोशल मीडिया पर चलाई जाती हैं, क्या वो ख़बर हैं ? इसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, सोशल मीडिया पर जो भी लिखा जा रहा है, वह सब ख़बर नहीं है। कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए विजयदत्त श्रीधर ने कहा, हिन्दी पत्रकारिता की 200 वर्ष की य़ात्रा प्रतिरोध की यात्रा है। स्वागत वक्तव्य में डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, पत्रकारिता के सामने कई चुनौतियां हैं। भाषाई पत्रकारिता के सामने और ज़्यादा चुनौतियां हैं। भारत की हिन्दी पत्रकारिता के 200 साल भारत की अस्मिता की रक्षा, सांस्कृतिक चेतना का इतिहास है।
आशीष वक्तव्य में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने माखनलाल चतुर्वेदी और गणेश शंकर विद्यार्थी को याद करते हुए कहा, ऐसे-ऐसे लोग थे उस समय पत्रकारिता में जिन्होंने देश को सबसे आगे रखा और अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया। कार्यक्रम के दौरान, आईजीएनसीए के मीडिया केंद्र द्वारा पत्रकारिता के 200 वर्षों की यात्रा पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। साथ ही, भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल तथा प्रो. प्रमोद कुमार ने मंच पर उपस्थित अतिथियों को ‘संचार माध्यम’ पत्रिका का ‘हिन्दी पत्रकारिता : 200 वर्ष’ विशेषांक भेंट किया। आईजीएनसीए की ओर से अतिथियों को स्मृति-चिह्न तथा सप्रे संग्रहालय की ओर से स्मृति-स्वरूप विशेष कलम भेंट की गई। अंत में, आईजीएनसीए के मीडिया सेंटर के प्रमुख अनुराग पुनेठा ने धन्यवाद ज्ञापन किया, जबकि मंच संचालन प्रसिद्ध न्यूज़ एंकर प्रीति सिंह ने किया।
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