नेपाल : बालेन सरकार के बजट में बेरोजगारी दूर करने के लिए नहीं दिखता कुछ भी

नेपाल में  नई सरकार बने सिर्फ 60 दिन हुए हैं. इस दौरान बालेन सरकार के कई फैसले विपक्ष और पुराने दलों को पसंद नहीं आए हैं। सुधारों के नाम पर व्यावसायिक वातावरण को ध्वस्त कर दिया गया है, जिससे व्यवसायी परेशान हैं, उधर सुकुमवासी (भूमिहीन) अपने ठिकानों से हटा दिए गए हैं। वे अपने भविष्य को लेकर डरे हुए हैं।

Written By : डॉ. रक्षा कुमारी झा | Updated on: June 1, 2026 11:28 pm

 पिछली सरकार की नियुक्तियों को नया कानून बनाकर सबको एक साथ बर्खास्त कर दिया गया है। दो दिन की छुट्टी के नकारात्मक प्रभाव स्वास्थ और शिक्षा क्षेत्र में देखने को मिल रहे हैं। सरकारी विज्ञापनों में सरकारी मीडिया का एकाधिकार होने से निजी क्षेत्र के मीडिया को दरकिनार कर दिया गया है। इससे हजारों छोटे मीडिया संस्थान के निम्न आय वर्ग के पत्रकार बेरोज़गार होने के कगार पर हैं। ऐसी स्थिति में बालेन सरकार का पेश किया गया बजट वास्तव में विज़नरी है ? नई सरकार द्वारा पेश किया गया बजट पुरानी सरकार से अलग है या नहीं, लाए गए बजट कितना वैज्ञानिक, वस्तुनिष्ठ, समन्यायिक, हर वर्ग-क्षेत्र के प्रति समभाव रखने वाला और देश को समृद्धि की राह पर ले जाने वाला है कि नहीं इसको देखना बेहद महत्वपूर्ण है।

बालेन सरकार की नेतृत्व में शुक्रवार को वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा संघीय संसद की संयुक्त बैठक में आगामी वर्ष 2083/84 के लिए लगभग 13 लाख करोड़ नेपाली रुपये का बजट पेश किया गया जिसमें विशेष रूप से ढांचागत विकास, शिक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े मंत्रालयों को बजट का बड़ा हिस्सा मिला है। सरकार का कहना है कि आर्थिक वर्ष के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण और सामाजिक क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हुए बजट पेश किया है। नया नेपाल बनाने की कड़ी में चाहे कितना भी बुनियादि ढांचा का विकास हो जाए अगर देश में रोजगार और उद्योग नहीं बढ़े तो जनता में निराशा फैलेगी। जानकारों का मानना है कि इस  बजट में बेरोजगारी की समस्या को हल करने के उपायों को प्रमुखता से रखना चाहिए था। देश में रोजगार के अवसर न होने के कारण 90 लाख युवा देश से बाहर रह रहे हैं। इससे पहले की सरकार भी यही गलती कर रही थी, जिसका परिणाम सरकार को भुगतना पड़ा था। पिछली और वर्तमान सरकार के बजट में यही अंतर होना चाहिए था जो नहीं हुआ है। अभी नेपाल की मुख्य समस्या बोरोजगारी का है, उसमें भी शिक्षितों की बेरोजगारी की।

बजट सरकार की नीति और प्राथमिकताओं का आइना भी होता है। नेपाल सरकार की वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा है कि रास्वपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा इस बार लाया गया बजट परिवर्तनकारी होगा और पिछली नीति को तोड़ेगा। लेकिन विपक्षी दलों का यह मानना है कि ये दावा सही नहीं है ,क्योंकि देश के राजस्व का स्रोत कमजोर बना हुआ है। पिछले साल की तुलना में इस साल की राजस्व काफ़ी कम है। जबकि देश का चालू खर्च इसके तुलना में काफी अधिक है। इस प्रकार सरकार की आय से देश का खर्च ही संभलने की स्थिति में नहीं है। 

देश पहले से ही कर्ज में दबा है। ऐसी स्थिति में सरकार साल में 12 हजार करोड़ भी विकास के लिए खर्च नहीं कर सकती। देश की अर्थव्यवस्था इतनी खराब हो चुकी है कि बजट जितना सुनने में प्रभावकारी दिखता है, उतना अमल में नहीं।  विपक्षी दलों का भी कहना है कि इस बजट में कृषि, औधोगिक उत्पादन, भूमिहीन और श्रमजीवी वर्ग की समस्या समाधान करने तथा बेरोजगारी समाप्त करने के लिए कोई ठोस योजना शामिल करनी चाहिए थी। इस तरह के बजट से देश ज्यादा विदेशी कर्ज के बोझ के तले दबते चला जाएगा।

लेखिका डॉ. रक्षा कुमारी झा नेपाल से हैं और जेएनयू से पीएचडी हैं।

ये भी पढ़ें :-नेपाल : प्रतिनिधि सभा की बैठक में पीएम बालेन शाह की अनुपस्थिति पर विपक्ष का हंगामा, ये है पूरा मामला

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *