अंडमान के समुद्र में तीसरे खोजी कुएं में भी मिली गैस, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिला बल

ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक खबर सामने आई है। अंडमान इलाके में समुद्र में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की एक बार फिर पुष्टि हुई है।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: June 6, 2026 12:08 am

सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) ने अपने अंडमान अपतटीय (ऑफशोर) ब्लॉक में तीसरे खोजी कुएं में गैस मिलने की जानकारी दी है। यह उसी ब्लॉक में दूसरी बार हाइड्रोकार्बन (तेल-गैस) की उपस्थिति की पुष्टि है, जिससे इस क्षेत्र की ऊर्जा संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

क्या है खोज का महत्व ?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल और गैस से पूरा करता है। ऐसे में अंडमान बेसिन में गैस की लगातार मिल रही सफलताएं देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे “ऊर्जा अवसरों का महासागर” बताया है और कहा है कि यह खोज भारत की समुद्री ऊर्जा क्षमता को नए स्तर पर ले जा सकती है।

अब तक क्या मिला है?

सितंबर 2025 में इसी क्षेत्र के विजयपुरम-2 खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस मिलने की पहली पुष्टि हुई थी। परीक्षण में गैस में लगभग 87 प्रतिशत मीथेन पाया गया था। इसके बाद 2026 में लगातार दूसरे और अब तीसरे खोजी कुएं में भी हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी दर्ज की गई है।

ताजा घोषणा के अनुसार, अंडमान के उथले समुद्री क्षेत्र (Shallow Offshore Block) में ड्रिल किए गए तीसरे खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस के संकेत मिले हैं। यह इस बात का संकेत है कि पूरा अंडमान बेसिन भविष्य में बड़े गैस भंडार का केंद्र बन सकता है।

तेल भी मिलने की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान बेसिन की भूगर्भीय संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के उन क्षेत्रों से मिलती-जुलती है जहां बड़े पैमाने पर तेल और गैस भंडार मिले हैं। इसी वजह से सरकार और तेल कंपनियां यहां गहरे समुद्री क्षेत्रों में भी व्यापक खोज अभियान चला रही हैं। हालांकि अभी तक गैस की उपस्थिति की पुष्टि हुई है, लेकिन खोजी गतिविधियां जारी हैं और भविष्य में तेल के बड़े भंडार मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

अभी सावधानी जरूरी

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी खोजी कुएं में गैस मिलने और उसके व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बीच लंबी प्रक्रिया होती है। अभी भंडार के वास्तविक आकार, उत्पादन क्षमता और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन किया जाना बाकी है। इसलिए इसे बड़ी सफलता तो माना जा रहा है, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंचने में अभी कुछ वर्ष लग सकते हैं।अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यहां कितना तेल या गैस उपलब्ध है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि अंडमान बेसिन ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं।

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