राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्रीय एजेंसियों के अनुसार परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं के प्रसार, अफवाहों और संगठित नकल नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए Telegram पर अस्थायी रोक को आवश्यक माना गया है। सरकार का तर्क है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस बीच परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। सूत्रों के अनुसार Re-NEET के प्रश्नपत्रों को अत्यधिक सुरक्षा के बीच सोमवार, 16 जून को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से पटना पहुंचाया गया। प्रश्नपत्रों को वहां से कड़ी निगरानी में सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाया गया, जहां बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की प्रक्रिया भी केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में पूरी की जाएगी।
हालांकि सरकार के इस फैसले को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कई तकनीकी विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकार समूहों का कहना है कि Telegram पर रोक लगाने भर से प्रश्नपत्र लीक या अनुचित गतिविधियों की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। उनका तर्क है कि WhatsApp, Signal, Facebook, Instagram, X और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब भी उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान संभव है। आलोचकों का कहना है कि यदि संगठित गिरोह सक्रिय हैं तो वे दूसरे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके जवाब में सरकारी सूत्रों का कहना है कि हाल के महीनों में प्रश्नपत्र लीक से जुड़े दावों और संदिग्ध गतिविधियों का सबसे बड़ा केंद्र Telegram के सार्वजनिक चैनल और बड़े समूह बने थे। इसलिए सबसे पहले उसी मंच पर कार्रवाई की गई जहां जोखिम अधिक पाया गया। अधिकारियों का कहना है कि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
पिछले वर्ष NEET परीक्षा को लेकर उठे विवादों और पेपर लीक के आरोपों के बाद इस बार केंद्र सरकार और NTA किसी भी प्रकार की चूक से बचना चाहते हैं। इसी कारण प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन, भंडारण और वितरण से लेकर परीक्षा केंद्रों की निगरानी तक हर स्तर पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।
सरकार का दावा है कि Telegram पर अस्थायी रोक, कड़ी निगरानी और बहुस्तरीय सुरक्षा प्रबंधों का उद्देश्य केवल एक है—देशभर के लाखों अभ्यर्थियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा उपलब्ध कराना। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर निगरानी के साथ-साथ परीक्षा तंत्र की संस्थागत मजबूती और लीक नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई ही दीर्घकालिक समाधान साबित होगी।
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