भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात के तट पार करने के दौरान हवा की गति लगभग 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती थी, जबकि तेज झोंकों की रफ्तार इससे अधिक होने की आशंका थी। तूफान की दिशा, गति और तीव्रता में बदलाव के कारण इसके तट से टकराने के समय और स्थान के आकलन में भी अंतर हो सकता है। ऐसे में ताजा आधिकारिक बुलेटिन के आधार पर ही वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।
आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा खतरा, हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए
आंध्र प्रदेश में चक्रवात को देखते हुए तटीय जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। विशाखापत्तनम, अनाकापल्ली, काकीनाडा, कोनसीमा तथा गोदावरी क्षेत्र के आसपास के जिलों में तेज हवाओं और भारी बारिश का खतरा जताया गया था। संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
27 अक्टूबर को उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में कम से कम 89 हजार लोगों को संवेदनशील तटीय क्षेत्रों से निकाला गया था। राहत शिविरों, चिकित्सा सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्था को सक्रिय किया गया। चक्रवात के कारण रेल और हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ने की खबरें थीं। शुरुआती सूचनाओं में 91 ट्रेनों और 21 उड़ानों को रद्द किए जाने का उल्लेख किया गया था।
प्रशासन की प्रमुख चिंता तटीय इलाकों में तेज हवाओं से होने वाले नुकसान, बिजली आपूर्ति बाधित होने, पेड़ों के गिरने और निचले क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका को लेकर है। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने और आम लोगों को समुद्र तट से दूर रहने की सलाह दी गई थी।
ओडिशा में पांच जिलों में शैक्षणिक संस्थान बंद रखने का फैसला
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भी सतर्कता बढ़ाई गई। गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई थी। इन जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज तथा आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने की घोषणा की खबरें थीं।
तटीय और पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश से जलभराव, स्थानीय बाढ़ और सड़क संपर्क बाधित होने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए तैयार रहने को कहा गया था।
इसी बीच, बंगाल की खाड़ी में एक अन्य निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित होने की संभावना पर भी नजर रखी जा रही थी। कुछ मौसम मॉडलों में इसके ओडिशा की ओर बढ़ने की आशंका जताई गई थी, हालांकि इसे दूसरे चक्रवात के रूप में विकसित होना निश्चित नहीं माना जा सकता।
पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान
चक्रवात का संभावित मुख्य लैंडफॉल आंध्र प्रदेश में होने के बावजूद पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। कोलकाता और दक्षिण बंगाल के कुछ इलाकों में बारिश होने की संभावना जताई गई, जबकि दक्षिण 24 परगना, पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर, झाड़ग्राम, बांकुड़ा, पुरुलिया तथा पश्चिम बर्धमान में 28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश का अनुमान था।
उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जैसे जिलों में 29 और 30 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका व्यक्त की गई थी। समुद्र की स्थिति खराब रहने की संभावना के कारण मछुआरों को समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई।
हालांकि, पश्चिम बंगाल में बारिश की तीव्रता और जिलेवार प्रभाव का निर्धारण मौसम तंत्र की दिशा तथा उसके आगे के विकास पर निर्भर करेगा। इसलिए सभी जिलों में समान स्तर के खतरे का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश पर भी नजर
चक्रवात के कमजोर पड़ने के बाद उसके अवशेषों से पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना पर भी नजर रखी जा रही थी। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के कुछ क्षेत्रों में मौसम प्रभावित होने की आशंका संबंधी पूर्वानुमान सामने आए थे। उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी 29 और 30 अक्टूबर के आसपास बारिश की संभावना का उल्लेख किया गया था।
हालांकि, इन राज्यों के सभी इलाकों में भारी बारिश होने की पुष्टि नहीं थी। तूफान के आगे बढ़ने, उसकी नमी और अन्य मौसम प्रणालियों के साथ उसके संपर्क के आधार पर स्थिति बदल सकती है। दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के लिए अलग से जारी मौसम चेतावनियों को देखना जरूरी होगा।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना जरूरी है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग निकासी संबंधी आदेशों को गंभीरता से लें। तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों से दूर रहें। समुद्र में मछली पकड़ने जाने से बचें तथा बिजली, पीने के पानी, जरूरी दवाइयों और दस्तावेजों की व्यवस्था पहले से रखें।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में संभावित लैंडफॉल और उससे होने वाले नुकसान को लेकर है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। 28 अक्टूबर को तूफान की वास्तविक स्थिति, उसके तट पार करने के समय और संभावित नुकसान का स्पष्ट आकलन नवीनतम आधिकारिक मौसम बुलेटिन तथा प्रशासनिक अपडेट मिलने के बाद ही किया जा सकेगा।
ये भी पढ़ें :-दिल्ली की हवा खराब होते ही GRAP-1 लागू, जानें प्रदूषण रोकने के लिए किए जा रहे कौन से उपाय