Book Review : रश्मि शर्मा को सी. एस. डी. एस. नेशनल इनक्लूसिव मीडिया फ़ेलोशिप (2013) में प्राप्त हो चुका है. इस संग्रह के पूर्व रश्मि की तीन कविता संग्रह ‘नदी को सोचने दो’,’मन हुआ पलाश’ और ‘वक्त की अलगनी’ पर प्रकाशित हो चुका है. रश्मि की कहानियां पिछले एक दशक में कई सम्मानित पत्रिकाओं में (राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय) प्रकाशित हो चुकी हैं. “बन्द कोठरी का दरवाजा” इनका पहला कहानी संग्रह है, पर इस पहले संग्रह से ही इन्होंने हिंदी कथा जगत में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा ली है.
इसकी मुख्य वजह है इनकी कहानियों के विषय का चयन. बहुत गम्भीरता से इन्होंने विषयों, वर्जनाओं समस्यायों, कठिनाइयों, मानवीय कमजोरियों, विसंगतियों और धृष्टताओं को अपनी कहानी के केंद्र में रखा है। संग्रह की अंतिम कहानी का एक प्रसंग देखिये: “मुझे माफ़ कर दो नसरीन। मैं तुम्हारा गुनाहगार हूँ। मगर मैं क्या करूं… मैं ऐसा ही हूँ बचपन से। मेरा किसी औरत की तरफ कभी जी नहीं ललचाया। मैं उस लायक ही नहीं!” अब नसरीन चौंकी….” क्या? मतलब तुम गे हो?” “हाँ”……कहकर सिसकता रहा रेहान। “फिर क्यों की मुझसे शादी? मेरी जिन्दगी बर्बाद करने का तुम्हें क्या हक है? मना क्यों नहीं किया? “हैरत और फिर गुस्से से कांप रही थी नसरीन’.
दो सौ पृष्ठ के इस कथा संग्रह “बन्द कोठरी का दरवाजा ” में बारह कहानियां हैं . 1.महाश्मशान में राग विराग 2. हादसा 3. मैंग्रोव वन 4. उसका जाना 5. नैहर छूटल जाय 6. निर्वसन 7. घनिष्ट-अपरिचित 8. मनिका का सच 9. लाली 10. जैबो झरिया, लैबो सड़ियां… 11. चार आने की खुशी और 12. बन्द कोठरी का दरवाजा. सभी कहानियां अलग-अलग आयाम की कहानियां हैं. एक अन्य कहानी के एक प्रसङ्ग को देखिए:-
“अरे हमर धनिया, एक बार नया काम हाथ में आए दे, देखबे…. साड़ी के साथ गहना-गुरिया भी खरीद देबौ। इहाँ मजूरी कुछ नहीं राखल हौ। चल हमर सङ्गे अपन जमीन, अपन धरती धनबाद। देखबी केतना जल्दी बगरा पैसा कमाय लेबौ।” (जैबो झरिया, लैबो सड़िया) कहानियों की प्रवाहमान भाषा और स्थानीय शब्दों, बोलियों का समुचित समावेश कथा संग्रह को विविधता प्रदान करता है. इस संग्रह के द्वारा रश्मि ने हिंदी साहित्य को अपना योगदान दिया है। संग्रह पठनीय और संग्रहणीय है।
Book Review
संग्रह: बन्द कोठरी का दरवाजा,
प्रकाशक: सेतु प्रकाशन
(पेपरबैक) मूल्य: 260 रुपये

(पुस्तक के समीक्षक प्रमोद कुमार झा रांची दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक हैं और कला व साहित्य के राष्ट्रीय स्तर के मर्मज्ञ हैं।)
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