देर से ही सही, आए तो…

यूपी बोर्ड ञफ मदरसा एजुकेशन एक्ट-2004 को हाईकोर्ट ने (High Court) ने असंवैधानिक घोषित कर दिया है। इसी आदेश के बाद सरकारी मदरसों को बंद करने का निर्णय लिया गया है।

Written By : श्याम नारायण प्रधान | Updated on: May 2, 2024 8:29 pm

उत्तर प्रदेश (UP) में सरकारी मदरसे बन्द किए जाएंगे। इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने 22 मार्च, 2024 को यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 (UP Board of Madarsa Education Act, 2004) को असंवैधानिक घोषित कर दिया। बात बड़ी देर से आई है कि यह एक्ट असंवैधानिक है। कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष सरकार के नेतृत्व में यह अधिनियम पारित हुआ था । अंशुमान सिंह राठौर ने एक याचिका दाखिल की थी कि उत्तर प्रदेश में यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 द्वारा दो बिन्दुओं पर संविधान के विरुद्ध काम हो रहा है। एक तो यह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और दूसरे मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों की तालीम को सिर्फ दीनी तालीम तक सीमित कर दिया गया है। यानी इनके बुनियादी शिक्षा के अधिकार का भी उल्लंघन हो रहा है। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होगा। वे आधुनिक जगत के विषयों से अनभिज्ञ रहेंगे और विकास की राह में पीछे रह जाएंगे। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने यह अहम फैसला दिया है। हालांकि इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। अब हाईकोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

प्रश्न यह उठता है कि सरकारों ने उधर देखने की जहमत क्यों नहीं उठाई? अल्पसंख्यकों के कल्याण को लेकर छाती पीटने वाले तमाम दल इस बात से बिल्कुल अनजान रहे कि मुसलमान बच्चों को भी बुनियादी शिक्षा हासिल कर जीवन में आगे बढ़ने का अधिकार है। दीनी तालीम पाकर वे मुल्ला-मौलवी बनने के अलावा और क्या कर पाते। सरकारों ने मुसलमानों को पीछे रखने के लिए ऐसा किया या फिर उनके हर काम से दूर रहकर धर्म निरपेक्ष होने का तमगा हासिल किया।

मदरसा चलाने वाले तो इसी में राजी हैं कि उनके मुताबिक बच्चे तालीम ले रहे हैं और वे दीन के सिपाही बनेंगे। ऐसे में उन बच्चों को कट्टर कहें या सच्चा कहें सिर्फ मुसलमान बनाकर ही कौम की खिदमत करने का फर्ज पूरा हो पाएगा क्या? विज्ञान कौन प़ढ़ेगा, समाजशास्त्र, गणित, तर्कशास्त्र जैसे विषय किसके लिए बने हैं? तार्किक मस्तिष्क का विकास इस बात से तो न हो पाएगा कि मुस्लिम बच्चे सिर्फ अपने मजहब की ही पढ़ाई करें। इससे कैसा जेहन बनेगा उनका? कोई इस पर विचार तो करे।

क्या मजहबी तालीम ही ऐसा बना पाती है कि देश के यशस्वी राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जनाजे में महज 500 लोग शरीक होते हैं और बुरहान वानी या हाल ही में बदायूँ में हुई हत्या के अपराधी साजिद की पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसके जनाजे में हजारों या लाखों लोग जाते हैं। यही दीनी तालीम का की कमाई है। कुफ्र या ईमान का झमेला ही ऐसी तालीम का हासिल है। फतवे आते हैं। 30 साल बाद भी सलमान रश्दी पर जानलेवा हमला होता है। कोई बताए कि यह किस पढ़ाई या तालीम का परिणाम है।

अदालत ने सरकार को यह निर्देश भी दिया है कि मदरसे के उन बच्चों को बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में तत्काल समायोजित किया जाए। साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि छह से 14 साल तक के बच्चे मान्यता प्राप्त संस्थानों में दाखिले से न छूटें। प्रदेश में मदरसों की जांच के लिए सरकार ने अक्तूबर 2023 में एसआईटी का गठन किया था। प्रदेश में इस समय कुल 16512 मदरसे हैं जिनमें से 560 सरकार से अनुदान प्राप्त हैं और करीब 8500 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं।

अब विरोध तो होना ही था और स्वागत भी। हाईकोर्ट के फैसले का भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष बासित अली ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले से बच्चों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मदरसों के हालात में बदलाव होना चाहिए। मदरसों में आज भी बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं। वहीं, मदरसा बोर्ड के चेयरमैन इफि्तखार अहमद जावेद ने कहा कि कोर्ट के फैसले को पढ़ने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। 20 साल के बाद इस कानून को असांविधानिक करार दिया गया है। जरूर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है।

हमारे वकील कोर्ट में पक्ष सही से नहीं रख सके। पर्सनल लॉ बोर्ड भी सुप्रीम कोर्ट जाएगा । मुस्लिम समाज को बड़े ही खुले मन व दृष्टि से विचार करना चाहिए कि उनके बच्चों का भविष्य कैसा होना चाहिए। उन्हें समय के साथ हमकदम होकर चलना चाहिए। दीनी तालीम घर पर भी दी जा सकती है किन्तु आधुनिक विषयों को पढ़कर ही वे सुनहरे कल की ओर अपने कदम मजबूती से बढ़ा पाएंगे। अभी समय आवाज दे रहा है। इन्हें सुनना चाहिए। बेहतर होगा। राष्ट्र का खोया हुआ गौरव तथा गरिमा हम तभी पा सकेंगे जब सबकी दृष्टि विकास की ओर लगी हो। अब से ही, आज से ही।

 

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