आईजीएनसीए में पुस्तक ‘क्राफ्ट सस्टेनेंस : ट्रेडिशन्स, ट्रांजिशन्स एंड ट्रांसफॉर्मेशन्स का लोकार्पण

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) द्वारा भारत की समृद्ध शिल्प परम्पराओं, पारम्परिक ज्ञान प्रणालियों तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था पर केंद्रित महत्त्वपूर्ण पुस्तक ‘क्राफ्ट सस्टेनेंस : ट्रेडिशन्स, ट्रांजिशन्स एंड ट्रांसफॉर्मेशन्स (शिल्प परम्पराएं : निरंतरता, परिवर्तन और रूपांतरण)’ का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन आईजीएनसीए के ‘आत्मनिर्भर भारत सेंटर फॉर डिजाइन’ (एबीसीडी) ने कियाय़ इस अवसर पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री लिली पांडेय तथा संस्कृति मंत्रालय के उप सचिव श्री शाह फैसल उपस्थित रहे। अपने संबोधन में डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, “यह संकलन दर्शाता है कि सुनियोजित सहयोग, डिज़ाइन हस्तक्षेप और बाज़ार से प्रभावी जुड़ाव के माध्यम से भारतीय शिल्प को रचनात्मक अर्थव्यवस्था का सशक्त हिस्सा बनाया जा सकता है।”

बाएं से दाएं - श्री शाह फैसल, सुश्री लिली पांडेय, डॉ. सच्चिदानंद जोशी, सुश्री सुप्रिया कंसल और सुश्री अनीता सूरी पुस्तक का लोकार्पण करते हुए
Written By : डेस्क | Updated on: July 8, 2026 9:37 pm

आईजीएनसीए द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का संपादन सुप्रिया कंसल ने किया है और इसकी भूमिका डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने लिखी है। यह पुस्तक भारतीय शिल्प परम्पराओं को केवल कलात्मक अभिव्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि जीवंत ज्ञान-प्रणालियों के रूप में प्रस्तुत करती है, जिनमें देशज ज्ञान, पारिस्थितिक बुद्धिमत्ता, सामग्री की समझ तथा सांस्कृतिक स्मृतियां समाहित हैं।

पुस्तक में यह विश्लेषण किया गया है कि औद्योगीकरण, वैश्वीकरण और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं के दौर में भारतीय शिल्प परम्पराएं किन चुनौतियों का सामना कर रही हैं। साथ ही, इसमें यह भी बताया गया है कि डिजाइन नवाचार, संस्थागत सहयोग, सतत विकास की अवधारणाएं तथा बाजारोन्मुख पहलें किस प्रकार पारम्परिक शिल्प पारिस्थितिकी को सुदृढ़ कर सकती हैं और शिल्पकार समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

यह प्रकाशन कुल 19 मौलिक शोध आलेखों का संकलन है, जिन्हें चित्रों, फोटोग्राफों और अभिलेखीय सामग्री से समृद्ध बनाया गया है। पुस्तक शिल्प, डिजाइन, सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मक उद्योगों तथा पारम्परिक ज्ञान प्रणालियों पर कार्य कर रहे विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और संस्थानों के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।

इस अवसर पर आत्मनिर्भर भारत सेंटर फॉर डिज़ाइन (एबीसीडी) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। लाल किले परिसर के बैरक एल-1 में स्थापित यह केन्द्र भारत की सांस्कृतिक एवं रचनात्मक अर्थव्यवस्था को डिज़ाइन-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से सशक्त बनाने की एक महत्त्वपूर्ण पहल है। यह केन्द्र शिल्पकारों, डिजाइनरों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर पारम्परिक शिल्पों के संरक्षण, संवर्धन और नवाचार को प्रोत्साहित करता है। शिल्प संवर्धन, उत्पाद विकास, कौशल उन्नयन, अनुसंधान, प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं, बाज़ार से जुड़ाव और उद्यमिता विकास जैसी पहलों के माध्यम से एबीसीडी पारम्परिक ज्ञान प्रणालियों की आर्थिक उपयोगिता को बढ़ाने तथा कारीगरों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में कार्यरत है।

‘क्राफ्ट सस्टेनेंस ट्रेडिशन्स, ट्रांजिशन्स एंड ट्रांसफॉर्मेशन्स (शिल्प निरंतरता : परम्पराएं, परिवर्तन और रूपांतरण)’ का प्रकाशन भारतीय शिल्प विरासत के संरक्षण, प्रलेखन और समकालीन संदर्भों में उसके पुनर्पाठ की दिशा में आईजीएनसीए का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। यह पुस्तक परम्परा और नवाचार के बीच सेतु का कार्य करते हुए भारतीय शिल्प को राष्ट्रीय एवं वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था में सशक्त स्थान दिलाने की दिशा में सार्थक योगदान प्रदान करती है।

ये भी पढ़ें :-सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने एनएमसीएम की प्रदर्शनी का अवलोकन किया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *