महासती पठान: इस तरह करें ध्यान का विशेष अभ्यास

महासती पठान का अर्थ है- अपनी स्मृति और सचेतनता में दृढ़ता से प्रतिष्ठित रहना। यह ध्यान का ऐसा रूप है जिसे चलते-फिरते, खड़े, बैठे, यहाँ तक कि सोते समय भी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य है निरंतर सचेतनता को विकसित करना और अपने शरीर व मन की हर गतिविधि के प्रति जागरूक रहना।

Written By : मृदुला दुबे | Updated on: January 29, 2025 12:09 am

महासती पठान के लाभ:

1. दैनिक जीवन में जागरूकता:
यह अभ्यास हमें हर क्षण सजग रहने की आदत डालता है, जिससे हम अपने विचार, भावनाएँ और प्रतिक्रियाएँ समझ पाते हैं।

2. मन की शुद्धि:
मन में छिपे विकारों को दूर कर शांति, संतोष और आनंद का अनुभव होता है।

महर्षि पतंजलि और तथागत बुद्ध का ध्यान:

महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग में ध्यान को सातवाँ अंग माना है।
तथागत बुद्ध ने आर्य अष्टांगिक मार्ग में “सम्मा समाधि” (सही समाधि) के माध्यम से मन को विकारों से मुक्त कर शुद्धि का मार्ग बताया है।

ध्यान का अर्थ:

ध्यान का अर्थ है अपना पूरा ध्यान किसी एक बिंदु पर केंद्रित करना। ध्यान का अभ्यास हमें अपने मन को समझने और नियंत्रित करने में मदद करता है| “मन वश में ना हो तो अशांत करेगा,
ध्यान से ही मन संतोष सहेगा।

ध्यान का अभ्यास:

1. मन को समझना

मन क्यों अशांत है?

विचार क्यों आते हैं?

मन झूठ क्यों बुलवाता है?

इन सवालों का उत्तर ध्यान के अभ्यास से मिलता है।

2. एकांत में बैठकर ध्यान

एकांत में बैठकर आँखें बंद करें। बिना हिले-डुले शांत बैठें और विचारों को केवल देखें।

3. आना-पान सती (सांस पर ध्यान)

सांस की गति को सजग होकर देखें।

सांस हल्की है या भारी?

तेज है या धीमी?
सांस को देखने का यह अभ्यास जागरूकता का पहला चरण है।

4. विपश्यना: संवेदनाओं का साक्षी होना

शरीर के हर अंग पर ध्यान केंद्रित करें।

सुख और दुखद संवेदनाओं को देखें।

केवल देखें, मूल्यांकन न करें| “साक्षी बन जो देखे मन को,
वही तो पाए शांति इस तन को।”

5. जागृत अवस्था में ध्यान:

चलते, फिरते, खाते-पीते, बात करते समय भी सजग रहें।

हर गतिविधि को साक्षी होकर देखें।

6. स्वप्न में जागरूकता:

स्वप्न अवस्था में भी यह समझें कि आप सो रहे हैं।

महा सती पठान के अनुभव :

1. सांस और संवेदनाओं का बोध:

सांस और शरीर की संवेदनाओं को देखते-देखते ध्यान गहरा होने लगता है।

2. नश्वरता का बोध:
संसार की अस्थिरता और नश्वरता का ज्ञान होता है।

3. मन की शुद्धि:

मन के विकार समाप्त होते हैं और शुद्धता के साथ आनंद का अनुभव होता है।

4. आत्म साक्षात्कार:
ध्यान के अभ्यास से आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति होती है |”मन निर्मल, जब शुद्ध बन जाए,
आत्मा आनंद से तब भर जाए।”

महा सती पठान का महत्व:

यह अभ्यास हमें अपने भीतर के आनंद और शांति को पहचानने में मदद करता है। ध्यान हमें सिखाता है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य ईश्वरीय अनुभव और आत्मज्ञान है। “सबमें मुझको देख सकूं,
और मुझमें सबको पहचान सकूं।”

निष्कर्ष:

महासती पठान ध्यान का अभ्यास व्यक्ति को अपने जीवन को नई दिशा देता है। यह अभ्यास हमें हमारे जीवन के सत्य से परिचित कराता है और हमें शांति, संतोष तथा आनंद के मार्ग पर अग्रसर करता है।”ध्यान ही है विश्राम स्थली।

(मृदुला दुबे योग शिक्षक और आध्यात्मिक गुरु हैं।)

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3 thoughts on “महासती पठान: इस तरह करें ध्यान का विशेष अभ्यास

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