हिन्दी, भारत की सांस्कृतिक धरोहर और आत्मा की भाषा है। इसे शीघ्र ही राष्ट्रभाषा घोषित किया जाएगा और इसका ध्वज पूरे विश्व में लहराएगा। यह एक वैज्ञानिक और सरल भाषा है, जो दुनियाभर में तेजी से फैल रही है। प्रत्येक भारतीय नागरिक को इसे गर्व और सम्मान के साथ अपनाना चाहिए। यह विचार भारत के कृषि राज्यमंत्री, रामनाथ ठाकुर ने शुक्रवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित विश्व हिन्दी दिवस समारोह के उद्घाटन के दौरान व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भारत के विकास की एक बड़ी बाधा बनी हुई है। अंग्रेज़ी को भारत से विदा होना चाहिए, जबकि सभी भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन अपनी मातृभाषा के प्रति सबसे अधिक प्रेम और सम्मान होना चाहिए।
इस अवसर पर श्री ठाकुर ने हिन्दी साहित्य और भाषा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले 20 साहित्यकारों को ‘हिन्दी रत्न’ सम्मान से विभूषित किया, जिनमें डॉ. कुमार वीरेंद्र, डॉ. सत्येन्द्र अरुण, डॉ. सुरेंद्र कुमार मिश्र, डॉ. राजीव कुमार सिंह ‘परिमलेन्दु’, डॉ. ममता मेहरोत्रा, डॉ. क़ासिम खुरशीद, डॉ. पूनम कुमारी, डॉ. रेखा मिश्र, डॉ. सुनील कुमार प्रियबचन, डॉ. राज किशोर राजन, डॉ. बलिराज ठाकुर, डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय, सुनील वाजपेयी, डॉ. गीता पुष्प शॉ, डॉ. शंकर मोहन झा, डॉ. रमेश शर्मा, अरविन्द कुमार सिंह, डॉ. तलत परवीन, विजय व्रत कंठ, और मुशर्रफ़ परवेज़ शामिल थे।
विश्व हिन्दी दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान श्री ठाकुर ने साहित्य सम्मेलन द्वारा प्रकाशित वरिष्ठ लेखिका डॉ. पूनम कुमारी की पुस्तक ‘स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाएँ एवं बिहार की महिलाओं का योगदान’, युवा नाटककार आचार्य अनिमेश के नाटक ‘जान है तो–‘, और सम्मेलन के वार्षिक पत्रिका का भी लोकार्पण किया।
सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश को एक राष्ट्रभाषा की आवश्यकता है, जो सम्पूर्ण देश को एक सूत्र में जोड़े। हिन्दी इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त भाषा है। उन्होंने भारत सरकार से शीघ्र हिन्दी को ‘राष्ट्रभाषा’ घोषित करने का आग्रह किया।
समारोह में मुख्य अतिथि, बिहार के सूचना आयुक्त ब्रजेश मेहरोत्रा ने भारत की प्राचीन संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी भाषाओं का सम्मान करते हुए हिन्दी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि किसी भी भाषा को उन्नत करने के लिए हमें अपने विचारों को भी उन्नत करना चाहिए, क्योंकि एक भाषा का स्तर उतना ही उंचा होता है जितना उसके विचारों का।
इसके अतिरिक्त, 2024 की बोर्ड परीक्षा में हिन्दी विषय में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ‘डा शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव मेधावी छात्र सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
समारोह का समापन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के साथ हुआ, जिसमें सम्मानित कवियों के अलावा डॉ. रत्नेश्वर सिंह, डॉ. मधु वर्मा, डॉ. कल्याणी कुसुम सिंह, आराधना प्रसाद, आरपी घायल, ब्रह्मानन्द पाण्डेय और अन्य प्रमुख कवियों ने अपनी रचनाओं से समारोह को ऐतिहासिक बना दिया।
सम्मेलन की कलामंत्री डॉ. पल्लवी विश्वास ने वाणी-वंदना का आयोजन किया, और वरिष्ठ कवयित्री सुजाता मिश्र ने केंद्रीय मंत्री को एक उत्कृष्ट मधुबनी पेंटिंग भेंट की।
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