समापन समारोह के मुख्य अतिथि इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी थे। इस अवसर पर ‘यमुना रिवर इनिशिएटिव (यारी)’ की मानद सचिव अम्बिका पंत, आईजीएनसीए के जनपद सम्पदा प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. के. अनिल कुमार, मीडिया सेंटर के नियंत्रक अनुराग पुनेठा तथा नदी उत्सव के संयोजक अभय मिश्रा सहित अनेक कला-संस्कृति प्रेमी, विशेषज्ञ, कलाकार और दर्शक उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, नदी से अपना पता जोड़ना केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और जीवन से उसके गहरे संबंध को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नदियां केवल भौगोलिक इकाइयां या जल के स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। आज हमें विचार करना होगा कि क्या हम अपनी नदियों के प्रति उतने ही संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि नदी उत्सव का उद्देश्य केवल रस्म अदायगी नहीं, बल्कि नदी के साथ समाज के सम्बंध को पुनः जीवंत करना है। प्रशासन और तंत्र अपना कार्य करेंगे, लेकिन एक समाज के रूप में हमें भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। नरेश सक्सेना की कविता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पुल पार करने से नदी पार नहीं होती, नदी को समझने के लिए उसमें उतरना होगा और उसके साथ होना होगा। उन्होंने कहा कि यमुना के साथ एकाकार होकर लिया गया संकल्प ही नदी उत्सव की सही परिणति होगी।
अंबिका पंत ने कहा कि 7वें नदी उत्सव से जुड़ना उनके लिए बहुत समृद्ध अनुभव रहा। यमुना रिवर इनिशिएटिव स्कूलों पर आधारित एक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य बच्चों का नदी से टूटा हुआ सम्बंध फिर से जोड़ना है। इस पहल के दौरान यह चिंताजनक बात सामने आई कि बच्चों को यमुना के बारे में बहुत कम जानकारी है। उन्हें यह भी पता नहीं है कि यमुना का केवल 22 किलोमीटर लंबा प्रदूषित हिस्सा ही पूरी यमुना की पहचान नहीं है।
नदी उत्सव के डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल – ‘द रिवर ऐज़ एन आर्काइविस्ट’ ने दर्शकों को नदियों को एक जीवित अभिलेख की तरह देखने का अवसर दिया। समापन सत्र में फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित फिल्मों में से चयनित फिल्मों को पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रथम पुरस्कार देवांग सैकिया की असमी भाषा की फिल्म ‘नॉयर कथा – टेल्स ऑफ द रिवरिन’ और बिश्वजीत दास की असमी भाषा की फिल्म ‘ह्वेयर डिड अवर रिवर फ्लो टू’ को प्रदान किया गया। द्वितीय पुरस्कार जयश्री बोरगोहेन की नेपाली भाषा की फिल्म ‘ह्वेन इट ऑल वेंट डार्क’ और तृतीय पुरस्कार सलमा सुल्ताना की हिन्दी व बांग्ला भाषा की फिल्म ‘बराक : बियॉन्ड द मैप’ को प्रदान किया गया।
उत्सव के अंतिम दिन ‘टू सेंचुरीज़ ऑफ यमुना : रिकंस्ट्रक्टिंग इट्स चेंजिंग फ्लो फ्रॉम रिवर विड्थ’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। वक्ताओं ने यमुना की बदलती धारा और उसके ऐतिहासिक स्वरूप पर विचार साझा किए। वहीं, श्री नवीन वत्स ने नदी फोटोग्राफी पर विशेष वार्ता के माध्यम से नदी को कैमरे की दृष्टि से देखने और उसके बदलते दृश्य-संसार को दर्ज करने की कला पर चर्चा की। ‘रिवर्स बिगिन ऑन लैंड : फॉरेस्ट्स, फ्लडप्लेन्स एंड रिवर रेस्टोरेशन इन इंडिया’ विषय पर ग्रीन इंडिया फाउंडेशन की विशेष प्रस्तुति ने इस विचार को रेखांकित किया कि नदी की कहानी उसके उद्गम से बहुत पहले शुरू हो जाती है। जंगलों, पहाड़ियों, वर्षा, मिट्टी और बाढ़ के मैदानों से होते हुए वह नदी का रूप लेती है। अतः नदी का पुनर्जीवन उसके पूरे पारिस्थितिक तंत्र के पुनर्संरक्षण से जुड़ा हुआ है।
उत्सव के तीसरे दिन का विशेष आकर्षण रहा फूलकुमारी द्वारा निर्देशित लाइव थिएटर प्रस्तुति ‘यमुना ट्रैवल्स प्राइवेट अनलिमिटेड’। प्रस्तुति ने दर्शकों को नदी के साथ अपने रिश्ते पर नए सिरे से सोचने के लिए प्रेरित किया। तीन दिनों तक चले इस उत्सव में नदी कभी लोक की आवाज बनी, कभी इतिहास का दस्तावेज, कभी सिनेमा का विषय, कभी फोटोग्राफर की दृष्टि और कभी रंगमंच का जीवंत पात्र। उत्सव ने यह संदेश दिया कि नदियों को समझना दरअसल अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को समझना है।
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