यह मामला इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों से जुड़ा है, जहां बीते कुछ दिनों से लोग उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी शिकायतों से जूझ रहे थे। प्रशासनिक स्तर पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से स्थिति बिगड़ती चली गई और मौतें हो गईं।
हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से मांगा पूरा ब्योरा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि राज्य सरकार यह बताए कि
दूषित पानी की आपूर्ति कैसे हुई?
कितने लोग बीमार पड़े?
मौतों की वास्तविक संख्या क्या है?
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई ?
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला नागरिकों के जीवन के अधिकार से जुड़ा है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान
घटना को लेकर जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से संवाददाताओं ने सवाल किया तो उनका रवैया विवादों में आ गया। एक राष्ट्रीय टीवी चैनल के रिपोर्टर के सवाल पर मंत्री ने कथित तौर पर ‘घंटा’ कहकर प्रतिक्रिया दी। इसके बाद, जब वे अन्य पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे, तो इस पूरे प्रसंग पर हंसते हुए दिखाई दिए। मंत्री के इस व्यवहार को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने कड़ी नाराज़गी जताई है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि जिस इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर बताया जाता है, वहीं लोगों को पीने के पानी से मौत हो रही है, जो सरकारी दावों की पोल खोलता है।
प्रशासन का दावा
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है, टैंकरों से स्वच्छ पानी पहुंचाया जा रहा है और मामले की जांच जारी है। पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें हाईकोर्ट में सरकार द्वारा पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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