चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। याचिकाओं में SIR से जुड़े फैसलों, चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को चुनौती दी गई है।
क्या सुप्रीम कोर्ट CEC के खिलाफ अंतरिम आदेश देगा?
सोमवार की सुनवाई का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ज्ञानेश कुमार को CEC के रूप में काम करने से रोकने या SIR से जुड़े विवादित फैसलों पर कोई अंतरिम निर्देश देने की मांग पर विचार करेगा। याचिकाओं में मांग की गई है कि सुनवाई लंबित रहने तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों का इस्तेमाल करने से रोका जाए। इसके साथ ही SIR से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक रिकॉर्ड, डेटाबेस, सर्वर लॉग और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया की जांच की मांग भी की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने लिखित असहमति या आपत्ति दर्ज की, इसके बावजूद संबंधित फैसलों को आयोग के निर्णय के रूप में लागू किया गया। इन आरोपों की सत्यता पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
सड़क पर बढ़ता दबाव
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले मामला सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली में लगातार प्रदर्शन हुए हैं और प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। शनिवार को पुलिस ने करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था; इससे पहले भी बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी।
वहीं रविवार को मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ सड़क पर उतरे। दोनों नेताओं ने ‘विराट गर्जना मोर्चा’ के जरिए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में SIR खत्म करने की मांग उठाई। कांग्रेस और शरद पवार गुट की NCP के नेता भी मार्च में शामिल हुए। मुंबई के प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें पार्टी झंडों के बजाय राष्ट्रीय ध्वज दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
विपक्ष और प्रदर्शनकारी SIR को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य मृत, डुप्लीकेट या अपात्र नामों को हटाकर मतदाता सूची की शुचिता सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि सोमवार की सुनवाई महत्वपूर्ण हो जाती है। अदालत के सामने एक तरफ चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता और दूसरी तरफ उसकी निर्णय प्रक्रिया तथा SIR को लेकर उठाए गए कानूनी सवाल होंगे।
आज की सुनवाई क्यों है सबसे बड़ा सवाल ?
SIR पर राजनीतिक विरोध पहले भी हो चुका है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी नई नहीं है। लेकिन 5 अक्टूबर की सुनवाई इस पूरे विवाद को एक नया कानूनी आयाम दे सकती है। अगर सुप्रीम कोर्ट अंतरिम राहत या रिकॉर्ड सुरक्षित रखने जैसे निर्देश देता है, तो SIR को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद का असर और बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अगर अदालत याचिकाओं में तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करती है, तो चुनाव आयोग को बड़ी राहत मिल सकती है और SIR की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो सकता है।
इसलिए अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि “ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?” असली सवाल है— क्या सुप्रीम कोर्ट आज SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर कोई ऐसा संकेत देगा, जिससे चुनाव आयोग बनाम विपक्ष की इस लड़ाई की अगली दिशा तय होगी?
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